मणिकर्णिका घाट प्रकरण को लेकर रविवार को वाराणसी में सियासी माहौल गरमा गया। समाजवादी पार्टी (सपा) के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने पुलिस कार्रवाई के विरोध में जमकर हंगामा किया। सपा सांसद वीरेंद्र सिंह मणिकर्णिका घाट जाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें रास्ते में ही रोक लिया। इसके बाद सांसद वीरेंद्र सिंह सड़क पर ही धरने पर बैठ गए, जिससे कुछ देर के लिए यातायात भी प्रभावित हुआ।

घटना की सूचना मिलते ही मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया। पुलिस अधिकारियों ने सपा सांसद और अन्य नेताओं को समझाने की कोशिश की, लेकिन वे मणिकर्णिका घाट जाने की अनुमति देने की मांग पर अड़े रहे। सपा नेताओं का कहना था कि वे शांतिपूर्वक घाट पर जाकर कथित रूप से क्षतिग्रस्त हुई राजमाता अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा के संबंध में जानकारी लेना चाहते हैं।

सड़क पर धरने के दौरान सपा नेताओं ने प्रदेश सरकार और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। उनका आरोप था कि काशी की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा मामला होने के बावजूद जनप्रतिनिधियों को सच्चाई जानने से रोका जा रहा है। सपा नेताओं ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताया।

वहीं पुलिस का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए एहतियातन कदम उठाए गए हैं। अधिकारियों के मुताबिक मणिकर्णिका घाट क्षेत्र संवेदनशील है और वहां भीड़ बढ़ने की आशंका को देखते हुए किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से बचने के लिए सपा नेताओं को आगे बढ़ने से रोका गया।

करीब कुछ समय तक चले हंगामे के बाद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने सपा नेताओं से बातचीत की। इसके बाद स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हुई, हालांकि क्षेत्र में देर शाम तक पुलिस बल तैनात रहा। मणिकर्णिका घाट प्रकरण को लेकर सियासी बयानबाजी लगातार तेज होती जा रही है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है।

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