गुजरात के धर्म सम्मेलन में पूज्यश्री सचिन्द्रनाथ महाराज ने गौ हत्यारे को ललकार कर दिया कठोर सन्देश गुजरात, वडोदरा | दादा गुरुजी भगवान मंदिर प्रांगण।

श्रीकुल पीठाधीश्वर, काशी ने गुजरात में शाश्वत हिन्दू जागृति के मंच से गौ-रक्षा पर ऐतिहासिक ललकार लगाते हुए सभा को उद्वेलित कर कहा कि “जो भूमि गौमाता को राष्ट्रमाता मानती है, वहाँ गौहत्या केवल अपराध नहीं, बल्कि संस्कृति, परिवार और धर्म पर आक्रमण है। जो कोई गौहत्या करेगा या उसकी तस्करी में लिप्त होगा, वह समाज, धर्म और राष्ट्र तीनों का अपराधी है।”

कार्यक्रम के दौरान महाराज जी ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए ललकारा कि गौहत्या रोकने के लिए जो भी खड़ा होगा या उसका वध करता है तो उसको 33 कोटि के देवताओं का पूर्ण आशीर्वाद और हजार गौदान के बराबर पुण्य लाभ प्राप्त होता है। क्योंकि गौ-रक्षा मात्र भावनात्मक नहीं, बल्कि धार्मिक-आध्यात्मिक उत्तरदायित्व है।

उन्होंने यह भी कहा कि “गौहत्या का प्रतिरोध करना केवल कानून का विषय नहीं बल्कि यह सनातन संस्कृति के अस्तित्व की रक्षा है। समाज और सरकार मिलकर कठोर दंड व्यवस्था बनाएँ, तभी तस्करी और अवैध कटान का अंत संभव है।” महाराज जी के इन शब्दों ने पूरे प्रांगण में नई ऊर्जा और संकल्प का संचार किया और गौभक्त युवाओं को प्रेरणा दी ।

गौमाता की भूमिका पर प्रकाश
डालते हुए महाराज जी ने बताया कि गौमाता भारतीय परिवार के पोषण, स्वास्थ्य और कृषि की आधारशिला रही हैं। वेदों में उन्हें देवतावतार, राष्ट्रमाता और सृष्टि के पोषण का मूल स्तंभ कहा गया है। उनका संरक्षण हमारी संस्कृति का संरक्षण है। उन्होंने बताया कि गौहत्या रोकने की दिशा में धार्मिक मंच, सामाजिक संगठन, प्रशासन और जनमानस सबको एकजुट होकर काम करना होगा।

वडोदरा में आयोजित इस दिव्य सम्मेलन में हज़ारों लोगों ने महाराज जी की प्रेरक वाणी को सुना। सभा में सर्वसम्मति से यह संकल्प लिया गया कि “जहाँ भी गौहत्या या तस्करी का प्रयास होगा, वहाँ समाज स्वयं प्रहरी बनकर खड़ा होगा।”

महाराज जी ने सभी युवाओं और धर्मप्रेमियों से यह भी आह्वान किया कि सनातन की रक्षा, गौमाता की रक्षा और राष्ट्रधर्म की रक्षा—अब हमारा सामूहिक संकल्प है उसके लिए अपने जीवन को सर्वस्व दान करना पड़े तो वो भी करूंगा। गाय, गंगा, गायत्री और गीता कि सेवा में समर्पित ये जीवन पूरे भारत में युवाओं के साथ एक नया इतिहास लिखने को तैयार है।

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