बनारस रेल इंजन कारखाना (बरेका) की पूर्वी कॉलोनी की भूमि आरएलडीए को दिए जाने के प्रस्ताव से बरेका कर्मचारियों में रोष।

बनारस रेल इंजन कारखाना (बरेका), वाराणसी की पूर्वी कॉलोनी की भूमि को रेल भूमि विकास प्राधिकरण (RLDA) को दिए जाने का प्रस्ताव अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण, अन्यायपूर्ण एवं कर्मचारी हितों के प्रतिकूल है। पूर्वी कॉलोनी बरेका की सर्वश्रेष्ठ, सुव्यवस्थित एवं पूर्ण विकसित आवासीय कॉलोनी है। यहाँ वर्षों से रेल कर्मचारी अपने परिवार सहित निवास कर रहे हैं। यह कॉलोनी शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा एवं आवागमन की दृष्टि से अत्यंत उपयुक्त स्थान पर स्थित है। ऐसी स्थिति में पूर्वी कॉलोनी के आवास धारकों को हटाकर आरएलडीए को भूमि दिया जाना, कर्मचारियों एवं उनके परिवारों को मानसिक, सामाजिक एवं आर्थिक रूप से गंभीर रूप से प्रभावित करेगा। वर्षों से बसे आवासीय ढांचे को समाप्त करने जैसा कदम होगा साथ ही कर्मचारियों में भारी असंतोष एवं असुरक्षा की भावना उत्पन्न करेगा। इस पत्र के सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद से पूरे बरेका कर्मियों में इस कार्य के प्रति काफी रोष व्याप्त है। जनभावना को देखते हुए उपरोक्त प्रस्ताव को वापस लेने हेतु बरेका प्रशासन से अनुरोध किया गया है।

बरेका की पूर्वी कॉलोनी की भूमि आरएलडीए को दिए जाने के प्रस्ताव के विरोध में बनारस रेल इंजन कारखाना में कर्मचारियों एक बड़ी बैठक आज दिनांक 30.01.2026 को संयुक्त सचिव प्रदीप कुमार यादव के आह्वान पर आयोजित की गयी, जिसमें शामिल लगभग सभी कर्मचारियों ने एक स्वर से बरेका के पूर्वी उपनगर को आर एल डी ए को देने का विरोध करते हुए कहा कि, बरेका अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए निर्मित इस शानदार उपनगर को जो पूरे वाराणसी शहर के शहरीकरण के लिए एक उदाहरण है बर्बाद नहीं होने दिया जाएगा और इसके लिए पुरजोर विरोध किया जायेगा। बैठक में आगे की रणनीति पर भी चर्चा की गई। इससे पहले एक विरोध पत्र माननीय केंद्रीय रेल मंत्री ,चेयरमैन रेल्वे बोर्ड एन अन्य बड़े पदाधिकारियों को शुक्रवार की सुबह दिया गया। बैठक में मुख्य रूप से, कर्मचारी परिषद सदस्य नवीन सिन्हा, सुशील सिंह, मनीष कुमार सिंह, अमित कुमार, संतोष कुमार यादव, धर्मेंद्र सिंह शामिल रहे।

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