वर्तमान परिदृश्य में प्रचलित ऑनलाइन से सुरक्षा BHU में आयोजित “ऑनलाइन हैकर्स से साइबर सुरक्षा“।

वर्तमान परिदृश्य में प्रचलित ऑनलाइन

”ऑनलाइन हैकर्स से साइबर सुरक्षा“

वर्तमान परिदृश्य में प्रचलित ऑनलाइन धोखाधड़ी को देखते हुए जीवन कौशल विकास प्रकोष्ठ (NLS Cell), दृश्य कला संकाय के द्वारा संकाय के विद्यार्थियों तथा कर्मचारियों हेतु जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के रूप में साइबर सुरक्षा पर काशी हिंदू विश्वविद्यालय के दृश्य कला संकाय के व्याख्यान सभागार LT-1 में आज दिनांक 10 फरवरी, 2026; दिन मंगलवार को एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन पूर्ण हुआ। इस कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में श्री मृत्युंजय कुमार सिंह (इथिकल हैकर एवं साइबर शोधकर्ता) उपस्थित रहे। उन्होंने इंटरनेट पर या ऑनलाइन कार्य करते समय उत्पन्न होने वाली समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की तथा उनसे होने वाले परिणामों तथा समाधानों के विषय में भी अवगत कराया। इस संबंध में इलॉक्ट्रानिक उपकरणों के लिए सुरक्षा उपायों को अपनाने हेतु उन्होंने कुछ टूल्स, एैप्स तथा सॉफ्टवेयर के नाम भी साझा किए। इनके विषय में जानकारी मिलने पर संकाय के विद्यार्थी तथा अन्य सभी जन लाभान्वित हुए।

कार्यक्रम का आयोजन दृश्य कला संकाय के जीवन कौशल विकास प्रकोष्ठ (NLS Cell) के सदस्यों डॉ॰ ललित मोहन सोनी (समन्वयक) तथा डॉ॰ सुरेश चन्द्र जांगिड (सह-समन्वयक) द्वारा किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रो॰ मनीष अरोड़ा (विभागाध्यक्ष, व्यावहारिक कला विभाग) द्वारा श्री मृत्युंजय कुमार सिंह को पुष्पगुच्छ देकर तथा उत्तरीय पहनाकर किया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ॰ सुरेश चन्द्र जांगिड ने किया। कार्यक्रम में प्रो॰ मनीष अरोड़ा, प्रो॰ ब्रह्मस्वरूप, डॉ॰ महेश सिंह, श्री विजय भगत, डॉ॰ सुनील कुमार पटेल तथा अन्य अध्यापकगणों के साथ संकाय के शोधार्थियों तथा विद्यार्थियों समेत लगभग 150 लोग उपस्थित रहे। कार्यशाला का सफल समापन डॉ॰ ललित मोहन सोनी तथा डॉ॰ महेश सिंह ने मुख्य वक्ता को स्मृति चिन्ह देकर किया।
इस संपूर्ण कार्यशाला से सभी को यह संदेश प्राप्त हुआ कि हमें बढ़ती हुई इंटरनेट की लाभ और हानियों को गहराई से समझना होगा और ऑनलाइन कार्य करते समय धोखाधड़ी जैसी समस्याओं के प्रति पूर्ण सावधानी रखते हुए अन्य लोगों को भी सजग करना होगा। शिक्षकों, विद्यार्थियों तथा अन्य सभी कर्मचारियों को भी ऑनलाइन कार्यों के प्रति सचेत होना होगा। जिससे कि आभासी दुनिया के भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए हम अपने विवेक का प्रयोग करते हुए मजबूती से तैयार हो सकें।

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