चंदौली, उत्तर प्रदेश-लोकसभा में बजट सत्र के दौरान चंदौली के सांसद वीरेंद्र सिंह ने जनपद के वंचित समाज, किसानों और युवाओं से जुड़े गंभीर मुद्दों को जोरदार ढंग से उठाया।


सबका साथ, सबका विकास” के दावे पर सवाल: चंदौली के वंचित समाज, आदिवासी , किसानों और युवाओं के मुद्दे सदन में गूंजे
चंदौली, उत्तर प्रदेश-लोकसभा में बजट सत्र के दौरान चंदौली के सांसद वीरेंद्र सिंह ने जनपद के वंचित समाज, किसानों और युवाओं से जुड़े गंभीर मुद्दों को जोरदार ढंग से उठाया। सांसद सिंह ने कहा कि सरकार “सबका साथ, सबका विकास” का दावा करती है, लेकिन चंदौली का वंचित समाज आज भी प्रशासनिक अस्पष्टता और सामाजिक उपेक्षा का सामना कर रहा है। सांसद ने सदन को अवगत कराया कि जनपद में गोंड, खरवार, पनिका, चेरो, बियार, कोल, भील, भर सहित कई समुदाय ऐसे हैं जिन्हें जाति की स्पष्ट परिभाषा और श्रेणीकरण के अभाव में जाति प्रमाण पत्र प्राप्त करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इस कारण उन्हें छात्रवृत्ति, आरक्षण और सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता, जिससे उनका सामाजिक-आर्थिक विकास बाधित हो रहा है। उन्होंने सरकार से मांग की कि इन समुदायों की जातीय स्थिति स्पष्ट कर प्रमाण पत्र निर्गमन की प्रक्रिया को सरल एवं पारदर्शी बनाया जाए।
आर्थिक सर्वेक्षण में जनजातीय, वनवासी और आदिवासी वर्गों के कल्याण की घोषणाओं का उल्लेख करते हुए सांसद ने चंदौली के लिए 500 बेड का आधुनिक छात्रावास, एक पीएम श्री विद्यालय अथवा कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय की स्थापना तथा एक मिनी स्टेडियम की स्थापना की मांग की |
उन्होंने कहा कि इससे जनपद के वंचित वर्ग के छात्र-छात्राओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और खेल सुविधाएं मिलेंगी तथा युवा प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा।
सांसद ने सदन में किसानों की समस्याओं को भी प्रमुखता से उठाया तथा MSP को कानूनी गारंटी देने, बटाईदार किसानों को प्राकृतिक आपदा में आर्थिक संरक्षण प्रदान करने के साथ साथ कृषि उपज को अमेरिका से हो रही डील से संरक्षित करने की मांग सदन में जोरदार ढंग से रखी। उन्होंने कहा कि किसान केवल उत्पादनकर्ता नहीं, बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा के आधार स्तंभ हैं; अतः उनकी आय और सम्मान की रक्षा करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
भवदीय

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