पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर देवरिया जेल में आमरण अनशन पर।
वे पुलिस से सीसीटीवी और सीडीआर मांग रहे हैं ताकि उनके साथ पुलिस ने जो अपराध किया है, उसका सबूत सामने आ सके।
मगर पुलिस उसे मुहैया नहीं करा रही है।
सोचिए कि व्यवस्था कैसे काम करती है!!
जो बाहुबली हैं।
जो कोडीन माफिया हैं।
जो रास्तों पर कब्जा कर रहे हैं।
जो सरेआम अवैध खनन कर रहे हैं।
सरेआम धमकियां दे रहे हैं।
वे सब आज़ाद हैं।
क्योंकि वे सभी “हम पंक्षी एक डाल के हैं।”
और एक ईमानदार पूर्व आईपीएस जो इस भ्रष्ट और गले तक सड़ चुके सिस्टम के खिलाफ बेखौफ आवाज़ उठा रहा है,
वो 25 साल पुराने मामले में 25 साल बाद दर्ज की गई एफआईआर के सहारे जेल में ठूंस दिया गया है
और वहां भी उसके साथ सिस्टम के दुर्व्यवहार और बदसलूकी का सिलसिला जारी है।
अमिताभ ठाकुर बेहद कमज़ोर हो चले हैं। उनकी जान पर बन आई है।
मगर इस सबके बावजूद अगर आकंठ भ्रष्टाचार और प्रचंड जातिवाद में डूबी हुई व्यवस्था की उन्होंने सांसे रोक रखी हैं,
तो उनके इस अदम्य साहस और प्रतिरोध की अभूतपूर्व शक्ति को बारम बार सलाम।
सत्ता का अमिताभ तो कोई भी हो सकता है।
मगर इतिहास का अमिताभ एक ही होता है!!!