“”सत्कर्म ही सबसे बड़ी देव पूजा है “”ब्रह्मराष्ट्र एकंम विश्व महासंघ न्यास एवं श्री कुलपीठ परिवार के द्वारा🚩 ,बाबा विश्वनाथ जी एवं मां भगवती पराम्बा की कृपा से, एवं श्रीकुल पीठाधीश्वर 1008डॉ सचिंद्रनाथ महाराज एवं महंत आनंद भैरव (राकेश पांडेय) के पावन सन्निधि में श्रीमद् भागवत का आयोजन ।

🚩 ब्रह्मराष्ट्र एकंम विश्व महासंघ न्यास एवं श्री कुलपीठ परिवार के द्वारा🚩 ,बाबा विश्वनाथ जी एवं मां भगवती पराम्बा की कृपा से, एवं श्रीकुल पीठाधीश्वर 1008डॉ सचिंद्रनाथ महाराज एवं महंत आनंद भैरव (राकेश पांडेय) के पावन सन्निधि में।।पंडित सीताराम पांडेय घाट, (पुराना पीपापुल) सामने घाट वाराणसी में, नवनिर्मित रामेश्वर मनोकामना मंदिर एवं श्रीरामेश्वर महादेव प्राण प्रतिष्ठा के उपलक्ष में आयोजित श्रीमद्भागवत सप्ताह कथा ज्ञान महायज्ञ के पंचम दिवस (20/02/26) में श्रीकुलपीठ के आचार्य प्रमोद त्रिवेदी जी महाराज ने दिव्य नंदोत्सव का वर्णन करते हुए पूतना उद्धार की कथा सुनाई, साथ ही माखन चोरी की लीला सुनाते हुए बताया कि भगवान का अवतार केवल दुष्टों का संघार करने के लिए नहीं अपितु अपने भोले भाले भक्तों को आनंदित करने के लिए उनके हृदय में प्रेम का संचार करने के लिए होता है इसीलिए व्रजवासियों के मनोरथ को सिद्ध करने के लिए भगवान नन्द भवन से बाहर निकल कर गोपियों के घरों में दूध दही माखन की चोरी करते हैं, साथ ही गोवर्धन लीला की कथा सुनकर श्रोता हुए भाव विभोर , भगवान ने इंद्र के अभिमान को मिटाने के लिए पहली बार इंद्र की पूजा बंद कराके गोवर्धन की पूजा कराई, साथ ही कर्म को ही गुरु और ईश्वर बताते हुए कहा कि सत्कर्म ही सबसे बड़ी देव पूजा है, एवं श्रीकुलपीठ के भक्तों के द्वारा छप्पन भोग भी लगाया गया,, एवं दिव्य भंडारे का भी आयोजन किया गया।।

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