चंदौली। जनपद के चर्चित मुकदमा अपराध संख्या 206/2020 में विशेष न्यायाधीश (एससी/एसटी एक्ट) न्यायालय, चंदौली ने महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए अभियुक्त शाकिर अंसारी को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया। न्यायालय ने साक्ष्यों, दस्तावेजों और गवाहों के बयानों के विस्तृत परीक्षण के उपरांत यह फैसला सुनाया।
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे सिद्ध करने में असफल रहा। वादी की तहरीर और न्यायालय में प्रस्तुत गवाही के बीच पर्याप्त सामंजस्य नहीं पाया गया। कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विरोधाभास सामने आने से अभियोजन की कहानी कमजोर पड़ गई, जिसके चलते आरोप प्रमाणित नहीं हो सके।
यह मामला थाना मुगलसराय क्षेत्र से संबंधित था, जिसमें अभियुक्त पर भारतीय दंड संहिता की धारा 323, 504, 506 तथा एससी/एसटी एक्ट की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत आरोप लगाए गए थे। बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता जुबैर अहमद, वरिष्ठ अधिवक्ता सरफराज आलम एवं कनिष्ठ अधिवक्ता गुलाम रसूल ने प्रभावी पैरवी करते हुए अदालत के समक्ष तथ्यात्मक और कानूनी पक्ष मजबूती से रखा।
न्यायालय ने अपने अवलोकन में कहा कि आपराधिक न्याय प्रणाली का मूल सिद्धांत है कि जब तक आरोप ठोस और विश्वसनीय साक्ष्यों से सिद्ध न हों, तब तक किसी भी व्यक्ति को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। संदेह की स्थिति में आरोपी को लाभ दिया जाना विधिसम्मत है।
फैसले में यह भी परिलक्षित हुआ कि एससी/एसटी एक्ट जैसे कठोर कानूनों का उद्देश्य समाज के वंचित वर्गों को सुरक्षा प्रदान करना है। ऐसे कानूनों का प्रयोग अत्यंत जिम्मेदारी और सावधानी के साथ किया जाना चाहिए, ताकि निर्दोष व्यक्ति अनावश्यक कानूनी और सामाजिक उत्पीड़न का शिकार न हों।
फैसले के बाद शाकिर अंसारी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “यह सत्य की जीत है। एक पत्रकार के रूप में मेरे सम्मान और सच्चाई की भी जीत हुई है।”
निर्णय के बाद समर्थकों में संतोष का माहौल देखा गया, वहीं यह फैसला पूरे जनपद में चर्चा का विषय बना हुआ है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय जांच एजेंसियों और वादियों के लिए एक संदेश है कि गंभीर धाराओं के प्रयोग में पर्याप्त प्रमाण और तथ्य होना अनिवार्य है।