इस दिव्य अवसर पर पूज्य महाराज जी द्वारा वैदिक परम्परा के अनुरूप मंत्रोच्चार, संकल्प एवं आशीर्वचन के साथ दोनों साधकों को दीक्षा प्रदान की गई। दीक्षा के माध्यम से उनके जीवन में दिव्य ऊर्जा, आत्मबल और साधनात्मक चेतना का संचार हुआ। यह क्षण न केवल व्यक्तिगत साधना का, बल्कि संगठनात्मक उत्तरदायित्व के प्रति और अधिक दृढ़ संकल्प का भी साक्षी बना।
पूज्य महाराज जी ने दोनों पदाधिकारियों को आशीर्वाद प्रदान करते हुए कहा कि गुरु कृपा से प्राप्त दीक्षा जीवन को अनुशासन, सेवा और साधना के मार्ग पर अग्रसर करती है। उन्होंने कामना की कि श्री समीर काँवले एवं श्री सुशांत तिनगुड़िया जी अपने जीवन में धर्म, कर्तव्य और राष्ट्रसेवा के भाव को आत्मसात करते हुए संगठन के उद्देश्यों को नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ाएँ।
इस अवसर पर मंदिर परिसर में आध्यात्मिक वातावरण व्याप्त रहा और उपस्थित श्रद्धालुओं ने भी इस दिव्य क्षण के साक्षी बनकर स्वयं को कृतार्थ अनुभव किया। ब्रह्मराष्ट्र एकम परिवार ने दोनों पदाधिकारियों के उज्ज्वल, सफल एवं मंगलमय भविष्य की कामना करते हुए इसे संगठन के लिए एक प्रेरणादायी एवं गौरवपूर्ण क्षण बताया।
