
रियायती बिजली समाप्त करने और निजीकरण की तैयारी के तहत कर्मचारियों के घरों पर जबरन लगाए जा रहे स्मार्ट मीटर के विरोध में मुख्य अभियन्ता वाराणासी क्षेत्र प्रथम/द्वितीय को संघर्ष समिति के प्रतिनिधि मंडल ने द्विय ज्ञापन: मुख्यमंत्री से हुए लिखित समझौते और रिफॉर्म एक्ट के उल्लंघन से प्रदेशभर के बिजली कर्मियों में रोष
*वाराणासी-23फरवरी2026*। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के पदाधिकारियों ने आज रियायती बिजली समाप्त करने और निजीकरण की तैयारी के तहत कर्मचारियों के घरों पर जबरन लगाए जा रहे स्मार्ट मीटर के विरोध में मुख्य अभियन्ता वाराणासी क्षेत्र प्रथम/द्वितीय से मिलकर उनको ज्ञापन दिया साथ ही कहा कि किसी कीमत पर मुख्यमंत्री से हुए लिखित समझौते और रिफॉर्म एक्ट के उल्लंघन को बर्दाश्त नही करेगा बिजलीकर्मी।
जबरन स्मार्ट मीटर बिजलिकर्मियो पर थोपने के विरोध में प्रदेशभर के बिजली कर्मियों में रोष जारी ।
वक्ताओ ने कहा है कि बिजली कर्मियों को पूर्व से मिल रही रियायती बिजली सुविधा समाप्त करने तथा बिजली व्यवस्था के निजीकरण/फ्रेंचाइजीकरण की तैयारी के तहत उनके आवासों पर जबरन स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं। संघर्ष समिति ने इसे मुख्यमंत्री के साथ हुए लिखित समझौते तथा उप्र पावर सेक्टर रिफॉर्म एक्ट का खुला उल्लंघन बताया है। इस कार्यवाही से प्रदेशभर के बिजली कर्मियों में गहरा आक्रोश व्याप्त है।
संघर्ष समिति के आह्वान पर आज प्रदेश के सभी जनपदों में बिजली कर्मियों ने एकजुट होकर जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन किया तथा जनपद के सर्वोच्च अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर आवासों पर जबरन स्मार्ट मीटर लगाए जाने का विरोध दर्ज कराया।
संघर्ष समिति ने बताया कि 25 जनवरी 2000 को तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री राम प्रकाश गुप्त के साथ हुए लिखित समझौते के तहत बिजली कर्मियों को मिल रही रियायती बिजली की सुविधा पूर्ववत जारी रखने का स्पष्ट प्रावधान किया गया था। इसी समझौते के आधार पर बनी ट्रांसफर स्कीम, 2000 में भी कर्मचारियों को पूर्ववत सुविधाएं जारी रखने की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।
संघर्ष समिति ने कहा कि उत्तर प्रदेश पावर सेक्टर रिफॉर्म एक्ट में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि विद्युत परिषद के विघटन के बाद कर्मचारियों की सेवा शर्तें और सुविधाएं किसी भी स्थिति में पूर्व से कमतर नहीं की जाएंगी। इलेक्ट्रिसिटी एक्ट, 2003 की धारा 133(2) भी इसी भावना को पुष्ट करती है।
ट्रांसफर स्कीम 2000 की धारा 12(बी)(2) में कर्मचारियों और पेंशनरों को रियायती दर पर बिजली सुविधा को उनकी सेवा शर्तों का हिस्सा माना गया है, जिसे किसी भी परिस्थिति में समाप्त या कम नहीं किया जा सकता। बिजली कर्मियों के लिए जारी टैरिफ आदेश में भी इसका उल्लेख होता रहा है।
संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि पावर कॉर्पोरेशन प्रबंधन द्वारा लखनऊ में वर्टिकल व्यवस्था लागू कर विद्युत व्यवस्था को अव्यवस्थित किया जा रहा है और लखनऊ के फ्रेंचाइजीकरण की तैयारी की जा रही है। निजी कंपनी को सुविधा देने के उद्देश्य से युद्ध स्तर पर कर्मचारियों के आवासों पर स्मार्ट मीटर लगाने की कार्रवाई की जा रही है।
संघर्ष समिति ने कहा कि प्रबंधन की इस प्रकार की कार्रवाइयों से ऊर्जा निगमों में औद्योगिक अशांति का वातावरण लगातार बढ़ रहा है।
संघर्ष समिति की प्रांतीय कार्यकारिणी की बैठक 26 फरवरी को लखनऊ में आयोजित की जा रही है। इस बैठक में रियायती बिजली सुविधा समाप्त करने के प्रयास, उत्पीड़नात्मक कार्याहियां वापस कराने, निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन तथा लघु जल विद्युत परियोजनाओं को निजी हाथों में सौंपे जाने के मुद्दों पर विचार कर आगे की रणनीति और आंदोलन की रूपरेखा तय की जाएगी।
प्रतिनिधि मंडल में सर्वश्री ई0 मायाशंकर तिवारी, राजेन्द्र सिंह, राजेश सिंह, मनोज जैसवाल, मनोज सोनकर,कृष्णमोहन,आदि रहे।
*(अंकुर पाण्डेय)*
मीडिया सचिव/प्रभारी
विधुत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उ0प्र0,वाराणासी।