नवनिर्मित श्री रामेश्वर मनोकामना मंदिर एवं श्रीरामेश्वर महादेव प्राण प्रतिष्ठा के उपलक्ष्य में आयोजित श्रीमद्भागवत सप्ताह कथा ज्ञान महायज्ञ के षष्ठ दिवस पर श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला।

वाराणसी। श्रीब्रह्मराष्ट्र एकं विश्व महासंघ न्यास एवं श्री कुलपीठ परिवार के तत्वावधान में सामने घाट स्थित पंडित श्री सीताराम पांडेय घाट (पुराना पीपापुल) पर नवनिर्मित श्री रामेश्वर मनोकामना मंदिर एवं श्रीरामेश्वर महादेव प्राण प्रतिष्ठा के उपलक्ष्य में आयोजित श्रीमद्भागवत सप्ताह कथा ज्ञान महायज्ञ के षष्ठ दिवस पर श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। कार्यक्रम बाबा विश्वनाथ जी एवं मां भगवती पराम्बा की कृपा तथा श्रीकुल पीठाधीश्वर 1008 डॉ. श्री सचिंद्रनाथ जी महाराज एवं श्रीमहंत आनंद भैरव जी (राकेश पांडेय) के पावन सान्निध्य में संपन्न हुआ। षष्ठ दिवस पर श्रीकुलपीठ के आचार्य प्रमोद त्रिवेदी जी महाराज ने गिरिराज महाराज की कथा का विस्तार से वर्णन करते हुए बताया कि जब भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्र की पूजा के स्थान पर गोवर्धन पूजा का विधान कराया, तब इंद्र अभिमानवश क्रोधित हो उठे और

व्रज को जलमग्न करने हेतु प्रलयंकारी तब भगवान ने गोवर्धन पर्वत ②ानी कनिष्ठा उंगली पर उठाकर इंद्र का अभिमान चूर किया और

व्रजवासियों की रक्षा की। इस प्रसंग के माध्यम से उन्होंने संदेश दिया कि भगवान की शरण में आए भक्त का कोई भी अहित नहीं कर सकता। आचार्य ने महारास की कथा के माध्यम से गोपियों के निष्काम, निष्कपट और अलौकिक प्रेम का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि यदि भक्त का प्रेम गोपियों जैसा हो तो स्वयं भगवान भी ऐसे भक्तों के ऋणी हो जाते हैं।

कंस वध तथा भगवान श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह प्रसंग का रसपूर्ण वर्णन कर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। इस अवसर पर श्रीकुल पीठाधीश्वर डॉ. सचिंद्रनाथ जी महाराज ने कहा कि भगवान की भक्ति में अहंकार सबसे बड़ा बाधक है। जब तक मनुष्य अहंकार का त्याग नहीं करता, तब तक सच्ची भक्ति संभव नहीं। कार्यक्रम के दौरान महाराज जी ने भक्तों के साथ पुष्पों की होली खेली और पुष्प वर्षा कर भक्तिमय वातावरण को और भी आनंदमय बना दिया। कथा समापन के पश्चात दिव्य भंडारे का आयोजन किया गया,

जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। पूरा वातावरण हरि-नाम संकीर्तन गुंजायमान रहा।

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