रेल मंत्रालय ने औंड़िहार–वाराणसी सिटी (31.36 किमी) खंड पर तीसरी रेल लाइन के निर्माण को स्वीकृति प्रदान की है। इस परियोजना पर 497.07 करोड़ रुपये की लागत आएगी।

497.07 करोड़ की परियोजना से बढ़ेगी रेल क्षमता, रोजगार और राजस्व

वाराणसी। रेल अवसंरचना के विस्तार को गति देते हुए रेल मंत्रालय ने औंड़िहार–वाराणसी सिटी (31.36 किमी) खंड पर तीसरी रेल लाइन के निर्माण को स्वीकृति प्रदान की है। इस परियोजना पर 497.07 करोड़ रुपये की लागत आएगी। मंजूरी अश्विनी वैष्णव के नेतृत्व में दी गई है।

यह परियोजना पूर्वी उत्तर प्रदेश के वाराणसी और गाजीपुर जनपदों में स्थित रेल खंड पर लागू होगी। कार्य शुरू होने के साथ ही बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन होने की संभावना है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा।

औंड़िहार–वाराणसी दोहरी लाइन खंड पर यात्री और मालगाड़ियों का भारी दबाव रहता है। औंड़िहार जंक्शन एक प्रमुख रेल केंद्र है, जहाँ से दरभंगा, रक्सौल, जयनगर, छपरा, गया, टाटानगर, कोलकाता, मऊ, गोरखपुर, बलिया, आजमगढ़, गाजीपुर, प्रयागराज, लखनऊ, कानपुर, दुर्ग, पुणे, मुंबई, गोंदिया, गुवाहाटी और नई दिल्ली सहित कई शहरों के लिए ट्रेनों का आवागमन होता है। लंबे समय से यहां तीसरी लाइन की मांग की जा रही थी, जिसे अब मंजूरी मिल गई है।

तीसरी लाइन के निर्माण से इस खंड की लाइन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इससे दोनों दिशाओं में अतिरिक्त यात्री गाड़ियों का संचालन संभव होगा और प्रतिवर्ष 1.99 मिलियन टन अतिरिक्त माल यातायात प्राप्त होने का अनुमान है, जिससे रेल राजस्व बढ़ेगा।

परियोजना पूरी होने पर ट्रेनों के डिटेंशन (अनावश्यक ठहराव) में कमी आएगी, जिससे समय की बचत और परिचालन लागत घटेगी। यात्रियों को अधिक नियमित, तेज और सुविधाजनक सेवाएं मिलेंगी। इसके साथ ही पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत के लिए अतिरिक्त गाड़ियों का संचालन भी संभव होगा।

तीसरी लाइन के निर्माण से वाराणसी और गाजीपुर सहित आसपास के क्षेत्रों के औद्योगिक, वाणिज्यिक और सामाजिक विकास को गति मिलेगी, वहीं औंड़िहार स्थित मेमू शेड के संचालन को भी मजबूती मिलेगी.

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