देशी दारू का ठेका हटाने को.लेकर महिलाओं ने किया हंगामा एक छोटे से गांव में पांच पांच ठेके कुछ ही दूर पर तीन स्कूल और एक मंदिर ।बच्चों से लेकर बूढ़े तक है नशे की लत में । महिलाओं का घर से निकलना हो रहा मुश्किल । महिलाओं की सिर्फ एक ही गुहार ठेका हटाओ।

लोहता। कोरौता गांव में हरीजन बस्ती के पास काफी दिनों से देशी दारू का ठेका खुला है। जिसको हटाने को.लेकर महिलाओं ने हंगामा किया। सूचनापाकर पुलिस मौंके पर पहुंची हंगामा कर रही महिलाओं को डांट फटकार लाठी चलाने की धमकी देकर हटाया।

गांव की महिलाओं एवं बेटियों ने आरोप लगाया है कि ।

पुलिस थाना पूरी तरह से ठेकेदारों से मिली हुई है। पुलिस वाले आते हैं और ठेकेदारों से पैसा लेकर चले जाते हैं। अगर नियम 10:00 बजे सुबह से 10:00 बजे रात तक का ही है तो फिर दिन रात यहां के ठेके क्यों चलाते हैं। 10:00 बजे रात के बाद पुलिस आती है ठेकेदार से मिलती है और चली जाती है और दारू का ठेका खुला रहता है।

ग्रामीण महिलाओं का यह गंभीर आरोप अकेलवा चौकी और लोहता थाने पर लगाया है।

ठेके के अगल बगल तीन स्कूल और एक मंदिर भी है।

महिलाओं ने यह भी कहा कि हरिजन बस्ती होने के नाते यहां पर पांच ठेके खोले गए हैं ।जो कि अगल-बगल तीन स्कूल एक मंदिर भी है जिससे लड़कियों को स्कूल जाने आने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।शराब के ठेके में बैठे शराबी आए दिन लड़कियों के साथ छेड़खानी करते रहते हैं ।अभद्र भाषा का उपयोग करते रहते हैं। जिससे उनका निकलना मुश्किल होता जा रहा है। अपनी पढ़ाई भी पूरी नहीं कर पा रही।

महिलाओं का कहना है कि गांव के बच्चे भी शराब की चपेट में आ चुके हैं। बच्चों को अगर रुको या डाटो तो बच्चे सीधे खुदकुशी करने की धमकी देते हैं।

भविष्य खतरे में है। जहां सरकार का नारा है बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ वही दलित ग्राम की बच्चिया पढ़ने से हो रही है वंचित। कारण शराब के ठेके।

ग्रामीण महिलाएं वर्तमान सरकार से अपील की है कि उनके गांव से ठेके हटाए जाएं।

1.अब सवाल यह है कि एक ही गांव में पांच ठेके खुलने का क्या कारण है।
2.क्या सरकार बिना जांच पड़ताल किए एक ही गांव में पांच ठेके खोलने का लाइसेंस दे देती है।

3. बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा देने वाली यह सरकार क्या दलित ग्राम की बेटियों की गुहार सुनती है।

    4. आखिर कब तक पुलिस प्रशासन गरीबों को दबाती रहेगी और पैसे वालों को सपोर्ट करती रहेगी।

    अब देखना यह है कि महिलाओं एवं बच्चियों की गुहार सरकार सुनती है या लाइसेंस धारी ठेकेदारों को ठेका इसी तरह चलाने की अनुमति देती है।

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