वाराणसी स्थित संकट मोचन हनुमान मंदिर में आयोजित विश्व प्रसिद्ध संकटमोचन संगीत समारोह के चौथे दिन शास्त्रीय संगीत की विविध विधाओं का अद्भुत संगम देखने को मिला। देश-विदेश के ख्यातिप्राप्त कलाकारों ने अपनी उत्कृष्ट प्रस्तुतियों से श्रद्धालुओं एवं संगीत प्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर दिया। मंदिर प्रांगण भक्ति और सुरों की मधुर लहरियों से सराबोर रहा।
कार्यक्रम की शुरुआत प्रख्यात शास्त्रीय गायक पं० उल्हास कशालकर के सुमधुर गायन से हुई। उनकी प्रस्तुति में सह-गायन, तबला और संवादिनी की संगत ने चार चांद लगाए। इसके पश्चात पं० विवेक सोनार ने बांसुरी वादन के माध्यम से वातावरण को सुरमयी बना दिया।
तीसरी प्रस्तुति में पद्मश्री से सम्मानित गायिका जसपिंदर नरूला ने भक्ति एवं सूफियाना गायन से श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। उनके आगमन पर मंदिर परिसर तालियों की गूंज से भर उठा। उन्होंने “जय श्री राम” के उद्घोष के साथ अपने भजनों की शुरुआत की और “तू ही सहारा” तथा “मनवा रे, जीवन है संग्राम” जैसे भजनों से वातावरण को भक्तिमय बना दिया। बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर परिसर, छतों तथा एलईडी स्क्रीन के बाहर तक उनकी प्रस्तुति का आनंद लेते नजर आए।
इसके उपरांत कौशिकी चक्रवर्ती ने अपनी सुरीली आवाज से शास्त्रीय संगीत की ऊँचाइयों का परिचय दिया। वहीं पं० देवाशीष भट्टाचार्या एवं सूर्यदीप्त भट्टाचार्या की गिटार जुगलबंदी ने श्रोताओं को एक नई संगीतात्मक अनुभूति प्रदान की। आगे चलकर महेश काले ने अपने प्रभावशाली गायन से समां बांध दिया।
कार्यक्रम के अंतिम चरण में पं० अलोक लाहिड़ी एवं अभिषेक लाहिड़ी की सरोद युगलबंदी ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। पूरे आयोजन के दौरान भारी भीड़ उमड़ी रही, जिसने काशी की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को एक बार फिर जीवंत कर दिया।
जसपिंदर नरूला का परिचय:
जसपिंदर नरूला का जन्म 14 नवंबर 1970 को हुआ। वे भारतीय पार्श्व गायन, हिन्दुस्तानी शास्त्रीय और सूफी संगीत की प्रसिद्ध गायिका हैं। वर्ष 1999 में फिल्म प्यार तो होना ही था के शीर्षक गीत के लिए उन्हें फिल्मफेयर पुरस्कार प्राप्त हुआ। उन्होंने मोहब्बतें, मिशन कश्मीर और बंटी और बबली जैसी फिल्मों में भी अपनी आवाज दी है। जनवरी 2025 में भारत सरकार द्वारा उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया, जो उनकी संगीत साधना का गौरवपूर्ण प्रमाण है।