वाराणसी। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के केंद्रीय कार्यालय के बाहर इन दिनों कर्मचारियों का विरोध प्रदर्शन तेज हो गया।

बीएचयू केंद्रीय कार्यालय के बाहर कर्मचारियों का विरोध, परीक्षा स्थगन की मांग तेज
वाराणसी। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के केंद्रीय कार्यालय के बाहर इन दिनों कर्मचारियों का विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है। प्रस्तावित कनिष्ठ लिपिक भर्ती परीक्षा को लेकर असंतोष के बीच तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी पिछले 24 घंटे से धरने पर बैठे हैं। उनकी मुख्य मांग है कि पहले उनका नियमितीकरण किया जाए, उसके बाद ही नई भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाए।
कर्मचारियों का कहना है कि वे लंबे समय से विश्वविद्यालय में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन अब तक उनका नियमितीकरण नहीं हो पाया है। इस संबंध में उन्होंने कई बार विश्वविद्यालय प्रशासन से संपर्क किया, लेकिन संतोषजनक समाधान नहीं निकल सका। हाल ही में विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के नियमितीकरण के लिए एक समिति का गठन किया गया है, जिसे कर्मचारियों ने सकारात्मक कदम बताया है। हालांकि, इसके बावजूद भर्ती प्रक्रिया शुरू होने से उनमें असंतोष बढ़ गया है।
दरअसल, विश्वविद्यालय प्रशासन ने 7 अप्रैल 2026 को 199 कनिष्ठ लिपिक पदों पर भर्ती के लिए अधिसूचना जारी की है। इसके तहत लिखित परीक्षा अप्रैल के अंतिम सप्ताह में प्रस्तावित है। कर्मचारियों का आरोप है कि जब तक उनके नियमितीकरण की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक नई भर्ती करना उनके साथ अन्याय होगा। इसी मांग को लेकर वे शांतिपूर्ण ढंग से धरना दे रहे हैं।
धरने पर बैठे कर्मचारियों ने यह भी बताया कि पहले उन्हें केंद्रीय कार्यालय से हटाकर मधुबन क्षेत्र में स्थानांतरित कर दिया गया था, जिससे उनकी समस्याएं और बढ़ गईं। उन्होंने आरोप लगाया कि धरना स्थल पर बीती रात बिजली आपूर्ति भी बाधित कर दी गई थी। इसके विरोध में कर्मचारियों को सड़क पर उतरकर प्रदर्शन करना पड़ा, जिसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने व्यवस्था बहाल की।
कर्मचारियों ने कुलपति को ज्ञापन सौंपते हुए मांग की है कि कनिष्ठ लिपिक परीक्षा को तत्काल स्थगित किया जाए और नियमितीकरण की प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
फिलहाल विश्वविद्यालय परिसर में स्थिति शांतिपूर्ण बनी हुई है, लेकिन कर्मचारियों के लगातार विरोध के चलते प्रशासन पर दबाव बढ़ता जा रहा है।

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