भारत कला भवन, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन
पुरालिपि शास्त्र एवं पुरालेख शास्त्र के अध्ययन से भारतीय ज्ञान परम्परा को नई दिशा मिलेगी – डॉ प्रियंका सिंह
पुरातात्त्विक एवं ऐतिहासिक अध्ययन के क्षेत्र में नवीन आयामों को उद्घाटित करने के उद्देश्य से “पुरालिपि शास्त्र एवं पुरालेख शास्त्र” विषय पर भारत कला भवन, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में एक राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन दिनांक- 07 से 13 अप्रैल 2026 तक किया जा रहा है। जिसमे देश के लब्ध प्रतिष्ठ विद्वानों द्वारा विभिन्न विषयों में क्रमशः व्याख्यान प्रस्तुत किए जा रहे हैं। इसी क्रम में आज प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्त्व विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ प्रियंका सिंह द्वारा प्रतिभागियों को ब्राह्मी तथा देवनागरी आदि प्राचीन लिपियों के विकास, स्वरूप एवं पठन प्रणाली पर सारगर्भित व्याख्यान के अतिरिक्त अभिलेखों के ऐतिहासिक विश्लेषण, तिथिकरण, प्रामाणिकता के निर्धारण के साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण पर भी विशेष सत्र आयोजित किए गए। जिनमें प्रतिभागियों को वास्तविक अभिलेखों एवं प्रकृतियों के माध्यम से अध्ययन, वाचन एवं शिलाओ पर उत्कीर्णन विधि के साथ स्टाम्पेज लेने का अभ्यास कराया गया। इस अवसर पर प्रोफेसर श्रीरूप राय चौधरी, निदेशक, भारत कला भवन ने कहा कि इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य प्राचीन लिपियों, अभिलेखों एवं शिलालेखों के अध्ययन, पठन-पाठन एवं व्याख्या की विधियों से शोधार्थियों, विद्यार्थियों एवं विद्वानों को परिचित कराना है। डॉ निशांत, उप- निदेशक भारत कला भवन ने कहा कि इस कार्यशाला से प्रतिभागियों में शोध-कौशल का विकास तथा स्वतंत्र रूप से अभिलेखीय स्रोतों का विश्लेषण करने की क्षमता विकसित होगी। डॉ. प्रियंका सिंह ने कहा कि इस प्रकार के कार्यशाला के सफल आयोजन से न केवल भारतीय ज्ञान परंपरा के अध्ययन को नई दिशा मिलेगी, अपितु युवा शोधकर्ताओं में अभिलेखीय स्रोतों के प्रति रुचि एवं दक्षता का भी विकास होगा। कार्यशाला में लगभग 42 की संख्या में शोधार्थी, स्नातक- स्नातकोत्तर के विद्यार्थी, इतिहास, पुरातत्व एवं संस्कृति से जुड़े शिक्षक एवं पुरालिपि में अभिरुचि रखने वाले स्वतंत्र विद्वानों के द्वारा प्रतिभाग किया जा रहा है। इस कार्यशाला के समन्वयक डॉ देवेंद्र बहादुर सिंह एवं डॉ दीपक भारथन अलाथुर हैं तथा सुश्री दीक्षा विशेष सहयोगी हैं।