
काशी, 14 अगस्त 2026। ब्रह्मराष्ट्र एकम् विश्व महासंघ न्यास (BRE), काशी के तत्वावधान में आयोजित द्वितीय ‘शिवपथ द्वादश ज्योतिर्लिंग यात्रा’ का भव्य समापन श्रद्धा और आध्यात्मिक उल्लास के साथ हुआ। यात्रा में श्रद्धालुओं ने देशभर में स्थित द्वादश ज्योतिर्लिंगों के दर्शन-पूजन के साथ भगवान शिव और शक्ति स्वरूपा मां संकठा का भी दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
यात्रा का सबसे विशेष आकर्षण विभिन्न देशों से लाई गई 140 नदियों के पवित्र जल से द्वादश ज्योतिर्लिंगों का जलाभिषेक रहा। आयोजकों के अनुसार, इस पहल के माध्यम से विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों की आस्था को भगवान शिव के चरणों में समर्पित किया गया और ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना को आध्यात्मिक स्वरूप देने का संदेश दिया गया।
यात्रा का नेतृत्व परम पूज्य श्री श्री 1008 डॉ. सचिन्द्र नाथ जी महाराज, संस्थापक अध्यक्ष, ब्रह्मराष्ट्र एकम् विश्व महासंघ न्यास एवं श्रीकुल पीठ पीठाधीश्वर, काशी के सान्निध्य में हुआ। यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं को संस्था की ओर से सहभागिता पत्र प्रदान किए गए। इसके साथ ही भस्म, रुद्राक्ष की माला, बेलपत्र और बाबा का प्रसाद वितरित किया गया।
विभिन्न ज्योतिर्लिंगों पर हुआ श्रद्धालुओं का स्वागत
यात्रा के दौरान विभिन्न ज्योतिर्लिंगों पर श्रद्धालुओं का आत्मीय स्वागत किया गया। सोमनाथ महादेव मंदिर में BRE के संयोजक श्री बृजेश सिंह ने महाराज जी सहित श्रद्धालुओं का स्वागत किया और मिश्रांबु की व्यवस्था की। वहीं बैद्यनाथ मंदिर में श्री अरविंद केशरी ने श्रद्धालुओं के स्वागत एवं जलपान की व्यवस्था संभाली। यात्रा के अंतिम चरण में मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग में BRE के संयोजक Rtn. जयदीप शुक्ला ने श्रद्धालुओं के लिए जलपान की व्यवस्था की और स्वयं सेवा कर आतिथ्य का परिचय दिया।
संतों और गणमान्यजनों की रही सहभागिता
यात्रा में छत्तीसगढ़ प्रदेश अध्यक्ष श्रीमती अन्नपूर्णा, श्रीमती नरवदा एवं सरस्वती, प्रशासनिक संपर्क प्रकोष्ठ अध्यक्ष श्री संजय श्रीवास्तव, दिव्यांग पीठ के पीठाधीश्वर स्वामी कृपानंद जी, श्री पुनीत जेटली, श्री अभय नंदन चतुर्वेदी, सामाजिक कार्यकर्ता श्रीमती चेतना पांडेय, प्रकोष्ठ अध्यक्ष श्री विकास बरनवाल, पर्यावरण प्रकोष्ठ से श्री संजय बरनवाल, संयोजक श्री कल्लू महाराज, ज्योतिष प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंडित प्रकाश मिश्रा, श्री भारत मेहता सहित कई गणमान्य लोग शामिल रहे।
इसके अलावा गुरु मां श्रीमती प्रिया मिश्रा, श्री कुशाग्र मिश्रा, श्री आर.एन. मिश्रा और महंत राकेश पाण्डेय सहित अनेक संत एवं श्रद्धालु यात्रा में सहभागी रहे। यात्रा के सफल संचालन में वैभव, संतोष, मलय, कमलेश, राकेश, रागिनी, हर्षिता, अंशिका, राजू, पवन, गोलू, अरविंद, सुजीत, सूर्यप्रकाश, प्रकाश, विकास, संदीप, अलोक सहित अनेक कार्यकर्ताओं और सेवाभावी सदस्यों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
शिव-शक्ति आराधना और विश्वबंधुत्व का संदेश
आयोजकों ने कहा कि द्वितीय शिवपथ द्वादश ज्योतिर्लिंग यात्रा केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति, शिव-शक्ति उपासना, सेवा, एकता और विश्वबंधुत्व का आध्यात्मिक अभियान रही। द्वादश ज्योतिर्लिंगों के दर्शन के साथ मां संकठा की आराधना ने यात्रा को शिव और शक्ति की संयुक्त उपासना का स्वरूप दिया।
वहीं 140 नदियों के पवित्र जल का भगवान शिव को समर्पण यात्रा का प्रमुख आकर्षण रहा। ब्रह्मराष्ट्र एकम् विश्व महासंघ न्यास ने यात्रा में सहभागी श्रद्धालुओं, संतों, विशिष्ट अतिथियों, संयोजकों, कार्यकर्ताओं और सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए इसे ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ और आध्यात्मिक एकता का संदेश देने वाला अभियान बताया।
हर हर महादेव। जय मां संकठा। वसुधैव कुटुम्बकम्।