सीएम योगी के निर्देश पर राजस्व परिषद की कार्रवाई, लंबित वादों के समयबद्ध निस्तारण में लापरवाही पर तय होगी जवाबदेही
लखनऊ, 8 सितंबर। योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत राजस्व मामलों में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर बड़ी कार्रवाई की गई है। राजस्व अदालतों में लंबित वादों के समयबद्ध निस्तारण में अपेक्षित प्रगति नहीं मिलने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश के क्रम में राजस्व परिषद ने पांच तहसीलदारों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। वहीं 13 तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
7 सितंबर को प्रदेश के सभी राजस्व न्यायालयों में उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धारा-34 के तहत दाखिल वादों के निस्तारण की तहसीलवार और अधिकारीवार समीक्षा की गई। समीक्षा के बाद लापरवाही सामने आने पर यह सख्त कदम उठाया गया।
इन पांच अधिकारियों पर गिरी गाज
निलंबित अधिकारियों में अमित यादव, तहसीलदार संडीला, हरदोई; कृष्ण कुमार मिश्रा, तहसीलदार देवरिया; सौरभ कुमार, तहसीलदार जौनपुर; रंजन वर्मा, तत्कालीन नायब तहसीलदार अयोध्या एवं वर्तमान तहसीलदार गाजीपुर; तथा अलख शुक्ला, तहसीलदार प्रतापगढ़ शामिल हैं।
इससे पहले 1 सितंबर 2026 को भी चार तहसीलदारों और एक नायब तहसीलदार को निलंबित किया जा चुका है।
13 अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस
राजस्व वादों के निस्तारण में लापरवाही के मामले में 13 तहसीलदारों एवं नायब तहसीलदारों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। इनमें चंद्रशेखर वर्मा, गोपाल जी, रविरंजन कश्यप, राकेश कुमार, कविता ठाकुर, देवानन्द तिवारी, स्नेहल वर्मा, राहुल सिंह, अनिल कुमार, यजुवेन्द्र सिंह, सुखवीर सिंह, रमाशंकर मिश्रा और शार्द सिंह शामिल हैं।
राजस्व परिषद की ओर से इन अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। अधिकारियों से जवाब मांगा गया है और जवाबदेही निर्धारित होने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
29 अगस्त की समीक्षा के बाद तेज हुई कार्रवाई
यह कार्रवाई मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा 29 अगस्त 2026 को राजस्व अदालतों में लंबित वादों की उच्चस्तरीय समीक्षा के बाद दिए गए निर्देशों के क्रम में की जा रही है। मुख्यमंत्री ने राजस्व मामलों का निर्धारित समयसीमा में हर हाल में निस्तारण सुनिश्चित करने तथा लापरवाही मिलने पर कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए थे।
राजस्व परिषद ने स्पष्ट किया है कि लंबित राजस्व वादों के निस्तारण में लापरवाही को किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। अधिकारियों के कामकाज की निगरानी लगातार जारी रहेगी और अपेक्षित प्रगति नहीं मिलने पर नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
सरकार का लक्ष्य राजस्व मामलों में समयबद्ध, पारदर्शी और प्रभावी निस्तारण सुनिश्चित करना है, ताकि किसानों और आम नागरिकों को राजस्व न्यायालयों से त्वरित न्याय मिल सके।