
साक्ष्यों के अभाव और संदेह का लाभ देते हुए अदालत का फैसला, पूर्व विधायक धनंजय सिंह पर हुए 2002 के हमले का मामला समाप्त।

वाराणसी बहुचर्चित ‘टकसाल सिनेमा’ गोलीकांड मामले में करीब 24 वर्षों बाद बड़ा फैसला सुनाते हुए विशेष न्यायाधीश (एमपी-एमएलए) यजुवेंद्र विक्रम सिंह की अदालत ने सभी आरोपियों को बाइज्जत बरी कर दिया। अदालत ने साक्ष्यों के अभाव और संदेह का लाभ देते हुए विधायक अभय सिंह समेत सभी आरोपियों को दोषमुक्त करार दिया।
इस मामले में आरोपी रहे विनीत सिंह, संदीप सिंह, संजय सिंह, विनोद सिंह और सत्येंद्र सिंह को भी अदालत ने ‘बेनिफिट ऑफ डाउट’ देते हुए दोषमुक्त कर दिया।
क्या था पूरा मामला
यह घटना 4 अक्टूबर 2002 की है, जब तत्कालीन निर्दलीय विधायक धनंजय सिंह अपने काफिले के साथ नदेसर स्थित टकसाल सिनेमा के पास से गुजर रहे थे। आरोप था कि बोलेरो सवार हमलावरों ने उनके काफिले पर अत्याधुनिक हथियारों से अंधाधुंध फायरिंग की थी। इस हमले में धनंजय सिंह और उनके गनर व ड्राइवर गंभीर रूप से घायल हो गए थे।
घटना के बाद धनंजय सिंह ने अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी अभय सिंह और उनके सहयोगियों पर हमले का आरोप लगाया था, जिसके बाद यह मामला पूर्वांचल की राजनीति में बेहद चर्चित बन गया था।
अदालत का फैसला
लंबे समय तक चले ट्रायल और गवाहों की सुनवाई के बाद अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा। इसी आधार पर सभी आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया।
कचहरी परिसर में कड़ी सुरक्षा
फैसले को देखते हुए वाराणसी कचहरी परिसर में अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। सुबह से ही 2 आईपीएस, 3 एसीपी, 350 से अधिक पुलिसकर्मी और पीएसी की टुकड़ियां तैनात रहीं। पूरे परिसर को छावनी में तब्दील कर दिया गया था, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।
राजनीतिक हलचल तेज
करीब ढाई दशक तक चले इस हाई-प्रोफाइल केस के फैसले के बाद पूर्वांचल की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। यह मामला लंबे समय से राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता और आपराधिक आरोपों के चलते चर्चा में रहा था।
निष्कर्ष:
24 साल बाद आए इस फैसले ने एक बड़े और चर्चित आपराधिक-राजनीतिक विवाद का पटाक्षेप कर दिया है। हालांकि, इस निर्णय के दूरगामी राजनीतिक प्रभाव आने वाले समय में देखने को मिल सकते हैं।