
उच्च न्यायालय ने भी अशोक इंटर कॉलेज के प्रबंध समिति को किया समाप्त।
अशोक इंटर कॉलेज बबुरी में चल रहे शासन के द्वारा भ्रष्टाचार, वित्तीय, नियमितता ,जमीन बेचने व लूट – खसोट की जांच में दोषी पाए गए ,अशोक सिंह प्रबंधक के खिलाफ शासन कई धाराएं लगाकर के इनको बर्खास्त कर दिया था। विगत 3 वर्षों से शासन (शिक्षा विभाग) की कड़ी मेहनत और सघन जांच के द्वारा दोषी पाए गए अशोक इंटर कॉलेज के प्रबंधक अशोक सिंह के खिलाफ 16d और 16d 4 की धारा के साथ कार्यवाही करते हुए इन्हें समिति सहित बर्खास्त कर दिया था। क्षेत्र की जनता के द्वारा दी गई अनुदानित भूमि चाहे वह समिति के रूप में हो, या अशोक इंटर कॉलेज के नाम से हो इसी जमीन पर सन 1957 से यह मान्यता प्राप्त विद्यालय आज भी स्थित है और विद्यालय की पूरी भूमि पर विद्यालय का ही स्वामित्व है। इतने वर्षों के बीच बहुत से प्रबंधक आए और चले गए, लेकिन प्रबंधक अशोक सिंह ने अपने निजी स्वार्थ और विद्यालय को हड़पने की नीयत से विद्यालय की जमीन लगभग 1.20 एकड़ को पहले रु,7लाख में अपने बेटे अभिषेक सिंह को बेच दिए। फिर पुनः विद्यालय व सोसाइटी की जमीन को बिना शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों के परमिशन से उसको फर्जी रूप से फर्जी ट्रस्ट बनाकर अपने भांजे को ₹9 लख रुपए में अनियमित रूप से अपने निजी स्वार्थ व जरूरत के लिए बेच दिए। यह निजी स्वार्थ व जरूरत की बाते रजिस्ट्री के स्टांप पेपर पर लिखित है। जबकि उच्च न्यायालय ने भी धारा 29 दो के तहत उनकी समिति को समाप्त कर दिया है , और नई समिति गठित कर शासन को चुनाव कराने का आदेश दिया है इस निर्णय के खिलाफ निलंबित प्रबंधक अपने बचाव के लिए न्यायालय के आदेश को ही पुनः चुनौती देने के लिए उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर दिया। न्यायालय ने स्वयं अपने निर्णय में यह आदेश किया है की विद्यालय के किसी भी प्रकार की सरकारी भूमि को बिना शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों की परमिशन व न्यायालय के आदेश के बिना कहीं भी किसी अन्य संस्था को ट्रांसफर नहीं किया जा सकता है। इसके बाद भी उच्च न्यायालय ने दोषी प्रबंधक के ऊपर शासन द्वारा लगाए गए 16D व 16D4 की धाराओं को समाप्त करते हुए, पुरानी कमेटी को बर्खास्त कर 3 महीने के अंदर पुनः नई कमेटी के द्वारा प्रबंध समिति का चुनाव कराने के लिए विद्यालय में नियुक्त प्राधिकृत नियंत्रक/जिला विद्यालय निरीक्षक चंदौली, व शासन को आदेशित किया है।
न्यायालय एक तरफ इनको दोषी करार करती हुई इनकी पुरानी कमेटी को प्रतिबंधित कर निरस्त कर दी है ।और दूसरी तरफ अनियमित ढंग से अपने निजी स्वार्थ के लिए विद्यालय की जमीन को बेचने व विद्यालय के सरकारी पैसों का गमन करने में दोषी पाए गए प्रबंधक के ऊपर लगी धाराओं से उन्हें मुक्त कर रही है।