
वाराणसी। साइबर अपराध को लेकर आम धारणा है कि ऐसे अपराधों को अंजाम देने वाले लोग अत्यधिक शिक्षित और तकनीकी विशेषज्ञ होते हैं, लेकिन वाराणसी साइबर सेल की जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। पुलिस के अनुसार, साइबर ठगी में शामिल अधिकांश आरोपी उच्च शिक्षित नहीं हैं, बल्कि उन्हें विशेष प्रशिक्षण देकर ऑनलाइन ठगी के लिए तैयार किया जाता है।
वाराणसी साइबर सेल द्वारा अब तक 103 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें आधे से अधिक आरोपी अशिक्षित या कम पढ़े-लिखे पाए गए हैं। पुलिस ने इन अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए करीब 6 करोड़ रुपये की ठगी की रकम फ्रीज कराई है, जबकि 76 लाख रुपये पीड़ितों को वापस भी दिलाए हैं।
ट्रेनिंग लेकर करते हैं साइबर ठगी
साइबर अपराधी केवाईसी अपडेट, बिजली बिल भुगतान, गिफ्ट ऑफर और एपीके फाइल जैसे तकनीकी झांसे देकर लोगों को निशाना बनाते हैं। जांच में सामने आया है कि ये अपराधी लगभग छह माह की ट्रेनिंग प्राप्त कर संगठित नेटवर्क के जरिए साइबर ठगी को अंजाम देते हैं।
20 साइबर अपराधियों पर गैंगस्टर एक्ट
साइबर अपराध के बढ़ते मामलों को देखते हुए वाराणसी पुलिस ने कड़ी कार्रवाई करते हुए 20 साइबर अपराधियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया है। यह कार्रवाई प्रदेश में साइबर अपराध के खिलाफ सख्त कदम मानी जा रही है।
जामताड़ा मॉडल पर काम करते हैं गिरोह
एसीपी साइबर सेल विदुष सक्सेना ने बताया कि गिरफ्तार किए गए कई आरोपी बिहार और झारखंड के जामताड़ा क्षेत्र से जुड़े हैं। वहां सीमित संसाधनों के बावजूद संगठित नेटवर्क बनाकर साइबर अपराध को अंजाम दिया जाता है। अधिकांश अपराधी समूह में काम करते हैं और तकनीकी सहायता के जरिए लोगों को निशाना बनाते हैं।
उन्होंने बताया कि हाल ही में एक साइबर गैंग का खुलासा हुआ, जिसमें अपराधियों का टेलीग्राम ग्रुप संचालित होता था। इस ग्रुप के माध्यम से एपीके फाइल और अन्य तकनीकी सामग्री साझा की जाती थी, जिसे लोगों को भेजकर उनके मोबाइल फोन हैक किए जाते थे।
साइबर अपराध में आई कमी
एसीपी विदुष सक्सेना के अनुसार, उत्तर प्रदेश में वाराणसी पहला जिला है जहां साइबर अपराधियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की गई। वर्ष 2026 में अब तक लगभग 17 करोड़ रुपये के साइबर फ्रॉड की शिकायतें दर्ज हुई हैं, जबकि पिछले वर्ष यह आंकड़ा करीब 30 करोड़ रुपये था।
उन्होंने बताया कि बढ़ती जागरूकता के कारण साइबर ठगी के मामलों में कमी देखने को मिल रही है। पुलिस ने इस वर्ष हुई ठगी की रकम में से करीब 6 करोड़ रुपये होल्ड कराए हैं, जबकि 76 लाख रुपये पीड़ितों को वापस दिलाए गए हैं।
आधुनिक तकनीक से अपराधियों पर शिकंजा
साइबर सेल अपराधियों तक पहुंचने के लिए आधुनिक तकनीक और विशेष तकनीकी उपकरणों का उपयोग कर रही है। पुलिस का दावा है कि इन संसाधनों की मदद से साइबर अपराधियों की पहचान और गिरफ्तारी में उल्लेखनीय सफलता मिल रही है।
मुख्य बिंदु:
- 103 साइबर अपराधी गिरफ्तार
- 20 आरोपियों पर गैंगस्टर एक्ट
- ₹6 करोड़ की रकम फ्रीज
- ₹76 लाख पीड़ितों को वापस
- अधिकांश आरोपी कम पढ़े-लिखे या अशिक्षित
- टेलीग्राम नेटवर्क और एपीके फाइल के जरिए ठगी
- वाराणसी में साइबर अपराध के मामलों में कमी