आषाढ़ पूर्णिमा पर सारनाथ से डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य का संदेश, बोले— भगवान बुद्ध का शांति और करुणा का संदेश आज पूरे विश्व के लिए प्रासंगिक।

समाचार आजकल।

● आषाढ़ पूर्णिमा पर सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ हायर तिब्बतन स्टडीज में आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए डिप्टी सीएम
● प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत भगवान बुद्ध की विरासत को वैश्विक पहचान दिला रहा है
● सारनाथ को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल होना भारत की सांस्कृतिक विरासत का गौरवपूर्ण सम्मान बताया

वाराणसी। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने मंगलवार को आषाढ़ पूर्णिमा के अवसर पर सारनाथ स्थित सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ हायर तिब्बतन स्टडीज के सभागार में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सहभागिता की। इस दौरान उन्होंने कहा कि आषाढ़ पूर्णिमा केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि मानवता, करुणा, अहिंसा और विश्व शांति का सार्वभौमिक संदेश देने वाला पावन दिवस है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत भगवान बुद्ध की अमर धरोहर को विश्वभर में नई पहचान और सम्मान दिला रहा है। भारत अपनी प्राचीन सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक विकास से जोड़ते हुए वैश्विक स्तर पर नई पहचान स्थापित कर रहा है।

अपने संबोधन में डिप्टी सीएम ने रूस यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां भगवान बुद्ध के प्रति लोगों की गहरी आस्था और भारत के प्रति सम्मान देखकर उन्हें गर्व की अनुभूति हुई। उन्होंने कहा कि यह भारत की हजारों वर्षों पुरानी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत की शक्ति का प्रमाण है।

केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि सम्राट अशोक की विरासत ने भगवान बुद्ध के विचारों को विश्वभर में पहुंचाया और आज डबल इंजन सरकार बुद्ध से जुड़े तीर्थ स्थलों को सड़क, रेल और हवाई मार्ग से बेहतर कनेक्टिविटी देकर धार्मिक पर्यटन को नई गति दे रही है।

उन्होंने सारनाथ को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल होने को भारत की सांस्कृतिक विरासत की ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह सम्मान पूरी मानवता की साझा धरोहर का सम्मान है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में भगवान बुद्ध के विचार विश्व को शांति, सह-अस्तित्व और सद्भाव का मार्ग दिखा रहे हैं।

इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री ने संत शिरोमणि गुरु रविदास महाराज की 650वीं जयंती पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए उनके सामाजिक समरसता, समानता और मानव सेवा के संदेश को अपनाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ के महासचिव शार्त्से खेंसुर जंगचुप चोएडेन रिम्पोचे, केंद्रीय उच्च तिब्बती अध्ययन संस्थान के कुलपति डॉ. वांगचुक दोरजी नेगी, महानिदेशक राघव प्रसाद भटनागर, डॉ. के. सिरी सुमेधा थेरो सहित देश-विदेश से आए अनेक भिक्षु, विद्वान और गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

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