वाराणसी। काशी के यातायात ढांचे को आधुनिक और सुगम बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए गंगा और वरुणा नदियों के किनारे प्रस्तावित दो मेगा एलिवेटेड रोड परियोजनाओं को प्रशासनिक स्तर पर महत्वपूर्ण मंजूरी मिल गई है। परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को गति देने हेतु जिला प्रशासन ने दोनों कॉरिडोरों के प्रस्तावित अलाइनमेंट में आने वाले 53 गांवों और इलाकों में जमीन की रजिस्ट्री, खरीद-बिक्री, गिफ्ट डीड, भूमि उपयोग परिवर्तन (लैंड यूज चेंज) तथा सरकारी आवंटन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।
21 किलोमीटर लंबा होगा वरुणा एलिवेटेड कॉरिडोर
प्रस्तावित वरुणा एलिवेटेड कॉरिडोर लगभग 21 किलोमीटर लंबा होगा और इसे उत्तर प्रदेश की सबसे लंबी एलिवेटेड सड़कों में शामिल माना जा रहा है। यह कॉरिडोर हरहुआ-राजातालाब आउटर रिंग रोड से शुरू होकर वरुणा नदी के किनारे-किनारे नमो घाट तक पहुंचेगा, जहां गंगा और वरुणा नदियों का संगम है।
संशोधित डीपीआर के अनुसार इस परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 6,000 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है। परियोजना का विकास राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा किया जा रहा है। केंद्र सरकार से इसकी मंजूरी मिल चुकी है तथा विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को भेजी जा चुकी है।
गंगा के समानांतर बनेगा 15 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड रोड
दूसरी प्रमुख परियोजना गंगा पैरेलल एलिवेटेड रोड है, जो लगभग 15 किलोमीटर लंबा चार से छह लेन का कॉरिडोर होगा। यह विश्व सुंदरी पुल (रिंग रोड) से शुरू होकर गंगा नदी के समानांतर चलते हुए निर्माणाधीन गंगा पुल तक पहुंचेगा।
परियोजना के अंतर्गत काशी विश्वनाथ धाम, अस्सी घाट और राजघाट क्षेत्र को बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करने के लिए तीन आधुनिक पेडेस्ट्रियन सस्पेंशन ब्रिज भी प्रस्तावित किए गए हैं। इनसे श्रद्धालुओं और पर्यटकों को पार्किंग स्थलों से घाटों एवं मंदिरों तक पैदल पहुंचने में सुविधा मिलेगी।
कई गांव होंगे प्रभावित
गंगा एलिवेटेड रोड परियोजना से सदर तहसील के रामना, डोमरी, सर गोवर्धनपुर, छित्तुपुर, भगवानपुर सहित कई गांव प्रभावित होंगे। वहीं वरुणा एलिवेटेड कॉरिडोर के लिए सदर और पिंडरा तहसील के 40 से अधिक गांव एवं इलाके, जिनमें हुकुलगंज, शाहरखास, पहाड़िया, बारागांव और कोइरान प्रमुख हैं, परियोजना की जद में आएंगे।
भूमि लेन-देन पर तत्काल प्रभाव से रोक
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए प्रभावित क्षेत्रों में जमीनों की खरीद-बिक्री, रजिस्ट्री, गिफ्ट डीड, भूमि उपयोग परिवर्तन और सरकारी आवंटन पर अगले आदेश तक रोक रहेगी। इससे भूमि संबंधी अनियमितताओं और सट्टेबाजी पर नियंत्रण रखने में मदद मिलेगी।
इन दोनों महत्वाकांक्षी परियोजनाओं के पूरा होने के बाद वाराणसी में यातायात का दबाव कम होगा, शहर के प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होगी तथा पूर्वांचल के विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।