
चंदौली। नगर पालिका क्षेत्र के सुभाष नगर स्थित तालाब की भूमि पर कथित अतिक्रमण के मामले में प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है। रविवार को एसडीएम राजीव मोहन सक्सेना की मौजूदगी में राजस्व विभाग की टीम ने तालाब की पैमाइश शुरू की। नापी शुरू होते ही इलाके में हड़कंप मच गया और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौके पर पहुंच गए। प्रशासन अभिलेखों के आधार पर यह पता लगाने में जुटा है कि तालाब की वास्तविक सीमा कितनी है और उस पर कितना अवैध निर्माण हुआ है।
सबसे बड़ा सवाल: 51 में से 42 तालाब आखिर गए कहां?
नगर पालिका के रिकॉर्ड में कुल 51 तालाब दर्ज हैं, लेकिन वर्तमान में केवल 9 तालाब ही मौके पर मौजूद मिले हैं। करीब 42 तालाब पिछले 15 वर्षों में रिकॉर्ड से जमीन तक पहुंचने से पहले ही गायब हो गए। अब सवाल उठ रहा है कि इतने वर्षों तक इन तालाबों की निगरानी किसकी जिम्मेदारी थी और आखिर इनके अस्तित्व पर संकट कैसे आ गया?
नगर पालिका और राजस्व विभाग की भूमिका पर उठ रहे सवाल
तालाबों का संरक्षण और अभिलेखों का रखरखाव नगर पालिका एवं राजस्व विभाग की संयुक्त जिम्मेदारी मानी जाती है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि यदि तालाबों की भूमि पर मकान बने, प्लॉटिंग हुई और दाखिल-खारिज तक हो गया, तो वर्षों तक संबंधित विभागों ने कार्रवाई क्यों नहीं की? क्या समय रहते निगरानी होती तो सार्वजनिक जलाशयों पर कब्जे रोके जा सकते थे?
तालाब पर मकान और प्लॉटिंग… आखिर अनुमति किसने दी?
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार तालाब की जमीन पर वर्षों से मकान बने हुए हैं और कई हिस्सों में प्लॉट काटकर बेचे भी गए हैं। कई संपत्तियों का दाखिल-खारिज भी हो चुका है। इससे बड़ा सवाल यह है कि यदि जमीन तालाब की थी, तो निर्माण, रजिस्ट्री और राजस्व अभिलेखों में नामांतरण की प्रक्रिया किन परिस्थितियों में पूरी हुई? हालांकि, इसकी आधिकारिक जांच अभी जारी है।
भू-माफियाओं पर आरोप, लेकिन प्रशासन ने नहीं की पुष्टि
स्थानीय लोगों का आरोप है कि भू-माफियाओं ने तालाब की भूमि पर कब्जा कर प्लॉटिंग कराई। हालांकि प्रशासन ने अभी किसी व्यक्ति या संस्था को दोषी नहीं ठहराया है। अधिकारियों का कहना है कि पैमाइश और अभिलेखों की जांच पूरी होने के बाद ही जिम्मेदारी तय की जाएगी।
2011 की सूची, 2026 की हकीकत
नगर पालिका के अनुसार वर्ष 2011 में नगर क्षेत्र के 46 तथा कूढ़े खुर्द और कुढ़कला के 5 तालाब दर्ज किए गए थे। इनमें से 8 तालाब मत्स्य पालन के लिए पट्टे पर हैं, जबकि एक तालाब न्यायालय के स्थगन आदेश के कारण लंबित है। बाकी तालाबों की स्थिति की जांच अब राजस्व विभाग और नगर पालिका संयुक्त रूप से कर रहे हैं।
अब क्या होगी कार्रवाई?
नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी धर्मराज सिंह के अनुसार राजस्व विभाग की रिपोर्ट मिलने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। यदि जांच में तालाब की भूमि पर अतिक्रमण की पुष्टि होती है तो अवैध कब्जे हटाए जाएंगे और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।
सबकी नजर जांच पर
सुभाष नगर की पैमाइश ने पूरे चंदौली में तालाबों की जमीन को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि 42 तालाबों के गायब होने का जिम्मेदार कौन है? क्या केवल अतिक्रमणकारियों पर कार्रवाई होगी या वर्षों तक लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होगी? इन सवालों का जवाब अब प्रशासनिक जांच और राजस्व विभाग की रिपोर्ट से सामने आएगा।