चातुर्मास महाव्रत के सप्तम दिवस पर जगद्गुरु शंकराचार्य ने बताया आत्मज्ञान का महत्व, द्वादश ज्योतिर्लिंग दर्शन यात्रा का हुआ समापन।

वाराणसी। श्री काशीधर्म पीठ रामेश्वर मठ, अस्सी में अनंत श्रीविभूषित काशीधर्म पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री नारायणानंद तीर्थ जी महाराज के पावन सान्निध्य में आयोजित चातुर्मास महाव्रत के सप्तम दिवस का सत्संग श्रद्धा, भक्ति एवं आध्यात्मिक वातावरण के बीच संपन्न हुआ। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने गुरुदेव के श्रीमुख से धर्मोपदेश का श्रवण कर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त किया।

अपने प्रवचन में पूज्य जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री नारायणानंद तीर्थ जी महाराज ने कहा कि आत्मज्ञान मनुष्य जीवन का मूल उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि यदि मनुष्य केवल सांसारिक सुख-सुविधाओं में उलझकर आत्मस्वरूप का ज्ञान प्राप्त नहीं करता, तो उसका जीवन अपने वास्तविक लक्ष्य से भटक जाता है। आत्मज्ञान ही मनुष्य को सत्य, शांति, वैराग्य और मोक्ष के मार्ग पर अग्रसर करता है।

इस अवसर पर सेंटर फॉर सनातन रिसर्च सेंटर द्वारा आयोजित काशी के द्वादश ज्योतिर्लिंग दर्शन यात्रा का समापन भी श्री रामेश्वर मठ में गुरुदेव के सान्निध्य में संपन्न हुआ। यात्रा पूर्ण होने के बाद श्रद्धालुओं ने विशाल भंडारे में प्रसाद ग्रहण कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

कार्यक्रम में सेंटर फॉर सनातन रिसर्च सेंटर के प्रदेश अध्यक्ष गणेश द्विवेदी तथा श्री काशीधर्म पीठ के व्यवस्थापक आनंदस्वरूप ब्रह्मचारी जी महाराज ने यात्रा में शामिल सभी श्रद्धालुओं एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए इसे सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।

कार्यक्रम में प्रवक्ता एडवोकेट विनय तिवारी, मनोज मिश्रा, दिलमोहन तिवारी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं भक्तगण उपस्थित रहे।

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