
वाराणसी। ड्यूटी के दौरान खनन अधिकारी प्रशांत शर्मा पर हुआ हमला न केवल एक सरकारी अधिकारी पर हमला है, बल्कि कानून व्यवस्था एवं सुशासन की भावना पर सीधा प्रहार है। यह घटना बेहद निंदनीय और चिंताजनक है। ऐसे अधिकारी जो अपनी जान की परवाह किए बिना शासन की नीतियों को धरातल पर उतारने का कार्य कर रहे हैं, उन पर हमला किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार्य नहीं हो सकता।
खनन अधिकारी प्रशांत शर्मा ने अपने कार्यकाल में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। वर्ष 2022-23 में जहां विभागीय लक्ष्य 60 प्रतिशत हुआ करता था, वहीं लक्ष्य में लगातार वृद्धि होने के बावजूद वर्ष 2025-26 में उन्होंने 114.8 प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया। यही नहीं, वर्ष 2022-23 में जहां लगभग 500 वाहनों पर कार्रवाई की जाती थी, वहीं वर्ष 2025-26 में लगभग 2500 वाहनों पर प्रभावी कार्रवाई कर अवैध खनन के विरुद्ध सख्त संदेश दिया गया।
वर्तमान वित्तीय वर्ष में भी अप्रैल, मई एवं जून माह के दौरान लक्ष्य बढ़ने के बावजूद विभाग ने शत-प्रतिशत राजस्व प्राप्त किया है। मात्र तीन माह में ही 800 से अधिक वाहनों पर कार्रवाई की गई तथा अवैध बालू भंडारण एवं तेंगना मोर मंडी जैसे अवैध गतिविधियों के केंद्रों को बंद कराया गया। यह उनकी कार्यकुशलता, ईमानदारी और प्रशासनिक दृढ़ता का प्रमाण है।
गौरतलब है कि 27 मई को चलाए गए विशेष अभियान के दौरान जिन लोगों के विरुद्ध कार्रवाई की गई थी, उन्हीं तत्वों द्वारा खनन अधिकारी को पहले धमकियां दी गईं और बाद में हमला कर अपनी आपराधिक मानसिकता का परिचय दिया गया। यह स्थिति अत्यंत गंभीर है और प्रशासन के लिए चेतावनी भी।
आज सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि क्या ऐसे हमलों के बाद अधिकारी अपना कर्तव्य निभाना बंद कर दें? क्या वे डरकर घर बैठ जाएं? क्या कानून लागू करने वाले अधिकारियों को अपनी आंखें बंद कर लेनी चाहिए क्योंकि अवैध खनन माफिया स्वयं को कानून से बड़ा समझने लगे हैं? यदि सरकार और प्रशासन अपने कर्तव्यनिष्ठ अधिकारियों की सुरक्षा नहीं कर पाएंगे तो आम जनता की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी?
प्रशांत शर्मा एक कर्मठ, निष्ठावान, ईमानदार एवं साहसी अधिकारी हैं। ऐसे अधिकारियों के कारण ही शासन की योजनाएं सफल होती हैं और सरकारी राजस्व में वृद्धि होती है। वर्तमान भाजपा सरकार सुशासन और कानून के राज के लिए जानी जाती है। इसलिए आवश्यक है कि इस घटना को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए दोषियों के विरुद्ध कठोरतम कानूनी कार्रवाई की जाए।
विशेष रूप से सुनील यादव एवं उसके टीएसवाई गिरोह जैसे आपराधिक तत्वों के विरुद्ध गैंगस्टर एक्ट सहित अन्य कड़ी धाराओं में कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में कोई भी माफिया या अपराधी कानून का पालन कराने वाले अधिकारी पर हमला करने का साहस न कर सके।
समाज को यह भी समझना होगा कि यदि आज कर्तव्यनिष्ठ अधिकारियों की सुरक्षा नहीं की गई तो कल उन अधिकारियों की कुर्बानियों की सूची में कुछ और नाम जुड़ जाएंगे, जिसका सबसे बड़ा दर्द अंततः उनके परिवारों को सहना पड़ेगा। इसलिए प्रशासन और सरकार की जिम्मेदारी है कि ऐसे अधिकारियों का मनोबल बढ़ाए, उन्हें सुरक्षा प्रदान करे और अपराधियों को कानून के अनुसार कठोर दंड दिलाए।
कानून का सम्मान और कानून लागू करने वालों की सुरक्षा ही एक मजबूत एवं सुरक्षित समाज की पहचान है।