
वाराणसी, 20 जून 2026। पुलिस कमिश्नरेट वाराणसी द्वारा साइबर अपराधों के विरुद्ध चलाए जा रहे विशेष अभियान ‘ऑपरेशन म्यूल स्ट्राइक’ के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए 4 थानों में कुल 6 म्यूल अकाउंट धारकों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया गया है। साइबर क्राइम सेल कमिश्नरेट वाराणसी एवं संबंधित थानों की संयुक्त टीम द्वारा 4 अभियोग पंजीकृत कर कार्रवाई की गई है।
पुलिस आयुक्त वाराणसी मोहित अग्रवाल एवं संयुक्त पुलिस आयुक्त अपराध आलोक प्रियदर्शी के निर्देशन में, पुलिस उपायुक्त अपराध नीतू कादयान तथा अपर पुलिस उपायुक्त अपराध/साइबर के पर्यवेक्षण में यह अभियान चलाया गया। सहायक पुलिस आयुक्त साइबर विदुष सक्सेना के नेतृत्व में साइबर क्राइम सेल एवं थाना साइबर सेल (सिगरा, भेलूपुर, चेतगंज और चोलापुर) की संयुक्त टीम ने कार्रवाई को अंजाम दिया।
पुलिस के अनुसार साइबर अपराधी ऑनलाइन गेमिंग, निवेश धोखाधड़ी, डिजिटल अरेस्ट, फर्जी कस्टमर केयर, लॉटरी और पार्ट-टाइम जॉब जैसे माध्यमों से लोगों को ठगी का शिकार बनाते हैं। ठगी की रकम सीधे अपने खातों में न मंगाकर विभिन्न व्यक्तियों के बैंक खातों, जिन्हें म्यूल अकाउंट कहा जाता है, में ट्रांसफर कराते हैं। इसके बाद रकम को कई खातों में घुमाकर जांच एजेंसियों से वास्तविक अपराधियों की पहचान छिपाने का प्रयास किया जाता है।
कार्रवाई के दौरान कुल 6 अभियुक्तों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया गया। इन खातों के संबंध में राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCCRP) पर कुल 51 शिकायतें दर्ज पाई गईं। जांच में सामने आया कि इन खातों के माध्यम से लगभग 2 करोड़ 42 लाख 89 हजार 752 रुपये की साइबर ठगी की धनराशि का लेनदेन हुआ है।
पुलिस ने बताया कि इन खाताधारकों से संबंधित 32 अन्य बैंक खातों की जांच भी वर्तमान में जारी है। कमिश्नरेट वाराणसी ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी प्रकार के लालच, कमीशन या नौकरी के झांसे में आकर अपना बैंक खाता किसी अन्य व्यक्ति को उपयोग के लिए न दें, अन्यथा उनके विरुद्ध भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
म्यूल अकाउंट क्या है?
म्यूल अकाउंट वह बैंक खाता होता है जिसका उपयोग साइबर अपराधी ठगी से प्राप्त धनराशि को स्थानांतरित करने, छिपाने या निकालने के लिए करते हैं। कई बार खाताधारक लालच, कमीशन, नौकरी के प्रलोभन या धोखे में आकर अपना खाता साइबर अपराधियों को उपलब्ध करा देते हैं।
पुलिस की अपील
साइबर अपराध से बचाव के लिए किसी भी संदिग्ध कॉल, लिंक या निवेश प्रस्ताव पर भरोसा न करें। किसी भी साइबर धोखाधड़ी की सूचना तत्काल हेल्पलाइन नंबर 1930 या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज कराएं।