काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास बोर्ड के रिक्त पदों को भरने की मुख्यमंत्री से मांग, वरिष्ठ अधिवक्ता ने भेजा पत्र।

वाराणसी, 5 जुलाई 2026। बनारस बार के पूर्व महामंत्री एवं वरिष्ठ अधिवक्ता नित्यानंद राय ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को स्पीड पोस्ट के माध्यम से पत्र भेजकर काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास बोर्ड में अध्यक्ष सहित रिक्त पांच पदों को शीघ्र भरने की मांग की है।

अपने पत्र में उन्होंने कहा कि जनवरी 1983 में जारी अध्यादेश के तहत काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास का गठन किया गया था। न्यास के प्रथम अध्यक्ष के रूप में काशी नरेश स्वर्गीय विभूति नारायण सिंह को नियुक्त किया गया था। उनके निधन (25 दिसंबर 2000) के बाद से अध्यक्ष का पद रिक्त है। उनका कहना है कि काशी विश्वनाथ मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार अध्यक्ष सहित कई पद अब भी खाली हैं, जिन्हें अध्यादेश की भावना के अनुरूप भरा जाना आवश्यक है।

नित्यानंद राय ने कहा कि न्यास बोर्ड के अध्यक्ष सहित एक-तिहाई पदों का रिक्त रहना न केवल गंभीर विषय है, बल्कि 14 मार्च 1997 को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा श्री आदि विश्वेश्वर ऑफ काशी विश्वनाथ बनाम स्टेट ऑफ उत्तर प्रदेश एवं अन्य मामले में दिए गए निर्णय की मंशा के भी विपरीत है। उन्होंने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि अध्यादेश और सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुरूप अध्यक्ष सहित सभी पांच नामित पदों पर हिंदू धर्म के विद्वान एवं मर्मज्ञ व्यक्तियों की नियुक्ति तत्काल की जाए।

उन्होंने बताया कि काशी विश्वनाथ मंदिर का प्रबंधन पूर्व में महंत एवं पुजारियों के पास था, लेकिन मंदिर में सोना चोरी की घटना के बाद तत्कालीन सरकार ने मंदिर का अधिग्रहण कर न्यास बोर्ड का गठन किया। बोर्ड में काशी नरेश को अध्यक्ष, श्रृंगेरी पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य को पदेन सदस्य तथा कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को सदस्य बनाया गया। इसके अलावा हिंदू धर्म के विद्वानों में से पांच सदस्यों को राज्य सरकार द्वारा नामित किए जाने का प्रावधान किया गया था।

वरिष्ठ अधिवक्ता का आरोप है कि इस प्रावधान का पूर्ण रूप से पालन नहीं किया गया और केवल मुख्य कार्यपालक अधिकारी की नियुक्ति कर औपचारिकता निभाई गई, जो सर्वोच्च न्यायालय की मंशा के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा कि मंदिर न्यास का गठन जिस उद्देश्य से किया गया था, उसकी गरिमा बनाए रखने के लिए रिक्त पदों को शीघ्र भरना आवश्यक है।

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