
समाचार आजकल।
नई दिल्ली। शिक्षा व्यवस्था में सुधार और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर पिछले 21 दिनों से जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की तबीयत शनिवार को गंभीर रूप से बिगड़ गई। इसके बाद उन्हें सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया।
21 दिनों तक लगातार भूख हड़ताल चलती रही, लेकिन सरकार की ओर से बातचीत की कोई ठोस पहल सामने नहीं आई। इसको लेकर विपक्ष और वांगचुक के समर्थकों ने केंद्र सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं।
समर्थकों का आरोप है कि जब एक शांतिपूर्ण आंदोलनकारी की सेहत लगातार गिर रही थी, तब भी सरकार ने उनकी मांगों पर गंभीरता नहीं दिखाई। उनका कहना है कि यदि समय रहते संवाद होता, तो स्थिति यहां तक नहीं पहुंचती।
वहीं प्रशासन का कहना है कि स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद एहतियातन उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज चल रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या लोकतांत्रिक तरीके से किए जा रहे आंदोलनों पर सरकार समय रहते संवाद करती है, या हालात बिगड़ने का इंतजार किया जाता है। फिलहाल सोनम वांगचुक का इलाज जारी है और उनके समर्थक सरकार से उनकी मांगों पर सकारात्मक पहल की उम्मीद जता रहे हैं।