
वाराणसी, 21 जुलाई। अधिवक्ता शशांक शेखर त्रिपाठी ने दिल्ली में संसद की ओर किए गए मार्च और उससे उत्पन्न कानून-व्यवस्था की स्थिति पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि लोकतंत्र प्रत्येक नागरिक को शांतिपूर्ण एवं संवैधानिक तरीके से अपनी बात रखने का अधिकार देता है, लेकिन कानून और प्रशासनिक निर्देशों की अनदेखी कर संवेदनशील क्षेत्रों की ओर बढ़ना उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि यदि किसी प्रदर्शन को प्रशासन से अनुमति नहीं मिली है, तो संसद जैसे सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्थान की ओर बढ़ने का प्रयास राष्ट्रीय सुरक्षा और कानून-व्यवस्था का गंभीर विषय बन जाता है। ऐसी स्थिति में पुलिस एवं सुरक्षा एजेंसियों द्वारा कानून के अनुसार आवश्यक कार्रवाई करना उनकी वैधानिक जिम्मेदारी है।
श्री त्रिपाठी ने कहा कि लोकतंत्र का अर्थ अराजकता या संवैधानिक संस्थाओं पर दबाव बनाना नहीं है। संसद देश की लोकतांत्रिक आस्था का सर्वोच्च प्रतीक है, जिसकी सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
उन्होंने सभी राजनीतिक दलों, छात्र संगठनों और सामाजिक संगठनों से संविधान और कानून की मर्यादाओं के भीतर रहकर अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का प्रयोग करने की अपील की। साथ ही कहा कि हिंसा, उग्र प्रदर्शन, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाना और सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती देना लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है।
अंत में अधिवक्ता शशांक शेखर त्रिपाठी ने कहा कि लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति संविधान, कानून के शासन और शांतिपूर्ण संवाद में निहित है तथा किसी भी परिस्थिति में कानून से ऊपर कोई नहीं हो सकता।