
वाराणसी (चिरईगांव)। वाराणसी के चिरईगांव स्थित जय गुरुबंदे आश्रम, छितौना (जाल्हुपुर) में जय गुरुबंदे स्वर योग साधना के तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय आध्यात्मिक कार्यक्रम के दूसरे दिन देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं ने सत्संग का लाभ लिया। इस दौरान स्वामी जय गुरुबंदे जी महाराज ने प्रेम, आत्मज्ञान और मानवता का संदेश देते हुए कहा कि सच्चा गुरु वही होता है, जो मनुष्य को जाति, मजहब, ढोंग, पाखंड और बाहरी आडंबरों से ऊपर उठाकर आत्मा और परमात्मा के मिलन का मार्ग दिखाए।
स्वामी जय गुरुबंदे जी महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि केवल धार्मिक ग्रंथों का ज्ञान सुनाने वाला व्यक्ति शिक्षक, आचार्य, कथावाचक, ऋषि या मुनि हो सकता है, लेकिन सद्गुरु वही है जो साधक के भीतर आत्मज्ञान का प्रकाश जगाकर उसे ध्यान और प्रेम के मार्ग पर अग्रसर करे। उन्होंने कहा कि सच्चे संत-महापुरुष अमरत्व की प्राप्ति करते हैं और उनके सानिध्य में रहने वाला साधक भी आत्मिक कल्याण की ओर बढ़ता है।
सत्संग के दौरान स्वामी जी ने अपनी पुस्तक ‘शब्द सुधा’ की पंक्तियां भी श्रद्धालुओं को सुनाईं—
“गुरु गुरु तो सब कहा, गुरु न परखा कोय।
गुरु जो परखा जय गुरुबंदे, पार वेद से होय।।”
नशा मुक्ति एवं पुनर्वास शिविर का भी हुआ आयोजन
कार्यक्रम के दौरान समाज में बढ़ती नशे की समस्या को देखते हुए Brain Rewire De-Addiction Center, सिद्धीकपुर (जौनपुर) द्वारा नशा मुक्ति परामर्श एवं पुनर्वास शिविर भी लगाया गया।
केंद्र के निदेशक राजेंद्र यादव (DACP, NISD, नई दिल्ली) ने बताया कि नशे की लत से जूझ रहे लोगों को यहां वैज्ञानिक एवं मनोवैज्ञानिक पद्धति से परामर्श और पुनर्वास की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि केंद्र का उद्देश्य युवाओं को नशे की गिरफ्त से बाहर निकालकर उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है।
राजेंद्र यादव ने कहा, “आज नशा परिवार और समाज दोनों को खोखला कर रहा है। हमारा प्रयास है कि हर पीड़ित व्यक्ति को सम्मान के साथ नई जिंदगी मिल सके।”
तीन दिवसीय इस आध्यात्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की सहभागिता रही और पूरे आश्रम परिसर में भक्ति, आध्यात्म और सामाजिक जागरूकता का वातावरण बना रहा।