वाराणसी में हिन्दू जनजागृति समिति की योगी आदित्यनाथजी और राष्ट्रीय महिला आयोग से मांग।

राज्य की बहुराष्ट्रीय कंपनियों में ‘कॉर्पोरेट जिहाद’, ‘हिंदू महिलाओं पर अत्याचार’ और ‘धार्मिक आतंक’ की जांच कर कड़ी कार्रवाई की जाए !

वाराणसी – महाराष्ट्र के नासिक शहर की एक प्रतिष्ठित बहुराष्ट्रीय कंपनी में काम करनेवाली हिंदू महिला कर्मचारियों की शिकायतों के अनुसार, पिछले चार वर्षों से जानबूझकर हिंदू महिलाओं का यौन उत्पीड़न करना, धर्मांतरण के लिए दबाव डालना, बीफ (गोमांस) खाने के लिए मजबूर करना और नमाज पढ़ने जैसी धार्मिक गतिविधियों के लिए विवश करने जैसी चौंकाने वाली घटनाएं हुई हैं । जिस तरह से संगठित रूप से हिंदू महिलाओं को निशाना बनाया गया वह ‘कॉर्पोरेट जिहाद’ का मामला लगता है । इस दृष्टि से राज्य की सभी आईटी और बहुराष्ट्रीय कंपनियों का विशेष सुरक्षा और धार्मिक भेदभाव विरोधी ऑडिट किया जाए इस मांग हेतु यहां के जिलाधिकारी श्री. सत्येन्द्र कुमार के माध्यम से हिन्दू जनजागृति समिति ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथजी तथा राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष को ज्ञापन दिया |

इस समय वाराणसी व्यापार मंडल के अध्यक्ष श्री. अजीत सिंह बग्गा, वाराणसी व्यापार मंडल के महामंत्री श्री. कवींद्र जायसवाल, चौरसिया व्यापार मंडल के अध्यक्ष श्री. सुनील चौरसिया, राष्ट्रभक्त अधिवक्ता समिति के संयोजक अधिवक्ता अरुण कुमार मौर्य एवं अधिवक्ता संजीवन यादव, अधिवक्ता अवनीश राय, श्री. सुनील गुप्ता और समिति के राजन केशरी उपस्थित थे ।

इस समय की गई अन्य मांगें :

  1. इस मामले की जांच राज्य आपराधिक जांच विभाग (CID) के अनुभवी अधिकारियों की एक विशेष जांच दल (SIT) द्वारा समयबद्ध तरीके से की जाए तथा जांच का दायरा केवल ‘यौन उत्पीड़न’ तक सीमित न रखकर ‘लव जिहाद’, ‘धार्मिक आतंक’ और ‘संगठित कॉर्पोरेट अपराध’ के कोन से भी जांच की जाए ।
  2. सभी कंपनी की भर्ती प्रक्रिया (Recruitment) की जांच हो कि क्या किसी विशिष्ट समुदाय को लाभ देकर हिंदू महिलाओं को निशाना बनाने की नीति अपनाई जा रही है।
  3. जिस कंपनी ने आंतरिक शिकायत समिति (ICC) को निष्क्रिय रखा अथवा प्राप्त शिकायतों को जानबूझकर दबाया है, उस कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) और निदेशक मंडल (Board of Directors) के विरुद्ध ‘आपराधिक लापरवाही’ (Criminal Negligence) का मामला दर्ज कर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
  4. राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) से इस गंभीर मामले में हस्तक्षेप कर स्वतः संज्ञान (Suo-moto) लेने और देशभर की बहुराष्ट्रीय कंपनियों (MNCs) के लिए नई ‘अनुपालन मार्गदर्शिका’ (Compliance Guidelines) जारी करने का आग्रह करें।

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