
मां गंगा निषाद राज सेवा न्यास ने बांटी राहत सामग्री, नाविकों ने प्रशासन से सहयोग नहीं मिलने का लगाया आरोप।
हालांकि, न्यास अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि सूची देने के बावजूद वास्तविक जरूरतमंद नाविकों तक राहत सामग्री नहीं पहुंचती। उनका दावा है कि नाविकों के लिए आने वाली राहत सामग्री के वितरण में विधायक, पार्षद और उनके परिचितों से जुड़े लोगों को प्राथमिकता मिलती है, जिससे जरूरतमंद नाविक वंचित रह जाते हैं।
वाराणसी। गंगा के बढ़े जलस्तर के बीच नाविकों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। नाविकों का कहना है कि पिछले 30 दिनों से अधिक समय से उनकी नावें बंद हैं और रोजी-रोटी प्रभावित है, जिससे परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। नाविकों का आरोप है कि इस दौरान प्रशासन की ओर से उन्हें कोई राहत सामग्री या आर्थिक सहयोग नहीं मिला।
नाविकों की परेशानी को देखते हुए मां गंगा निषाद राज सेवा न्यास की ओर से जरूरतमंद नाविकों के बीच राहत सामग्री वितरित की गई। इस दौरान नाविकों ने अपनी समस्याएं खुलकर सामने रखीं और सरकार एवं प्रशासन से तत्काल राहत की मांग की।
‘बाढ़ के समय नावें बंद करना हमारी रोजी-रोटी पर चोट’
निषाद समाज से जुड़े नाविकों का आरोप है कि इसी सरकार के कार्यकाल में उनकी नावों के संचालन पर रोक लगाई जा रही है। उनका कहना है कि बाढ़ और गंगा के बढ़े जलस्तर के समय पहले भी परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण रही हैं, लेकिन उनकी नावों के संचालन को इस तरह लगातार बंद नहीं किया जाता था।
नाविकों का यह भी आरोप है कि एक ओर गंगा नदी में धार्मिक और अन्य आयोजनों के लिए नावों का इस्तेमाल किया जाता है, वहीं दूसरी ओर जिन नावों से गरीब नाविकों और उनके परिवारों की रोजी-रोटी चलती है, उन्हीं के संचालन पर रोक लगा दी जाती है।
नाविकों ने इसे ‘दोहरा रवैया’ बताते हुए कहा कि सरकार से उन्हें केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था चाहिए जिससे उनकी रोजी-रोटी चल सके और बाढ़ अथवा जलस्तर बढ़ने की स्थिति में प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता मिल सके।
‘वोट के समय याद आते हैं गरीब, संकट में कोई पूछने वाला नहीं’
नाविकों में सरकार के प्रति नाराजगी भी दिखाई दी। उनका आरोप है कि गरीब और नाविक समाज की समस्याओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है और वोट बैंक की राजनीति के कारण उनकी समस्याएं नजरअंदाज की जा रही हैं।
नाविकों ने अपने समाज से जुड़े नेता एवं प्रदेश सरकार में मंत्री संजय निषाद से भी सवाल किया कि जब निषाद समाज के हजारों लोगों की रोजी-रोटी प्रभावित हो रही है तो उनकी समस्याओं को सरकार के सामने प्रभावी तरीके से क्यों नहीं उठाया जा रहा है। कुछ नाविकों ने उनके प्रति नाराजगी जताते हुए कहा कि उन्हें अपने समाज की समस्याओं को प्राथमिकता से उठाना चाहिए।
नाविकों ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि प्रभावित परिवारों का सर्वे कराकर उन्हें राहत सामग्री, आर्थिक सहायता तथा नाव संचालन से जुड़ी स्पष्ट व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए, ताकि लंबे समय से बंद पड़ी उनकी रोजी-रोटी दोबारा शुरू हो सके।