
वाराणसी। सद्गुरु कबीर साहेब के प्राकट्य महोत्सव के त्रिदिवसीय आयोजन के दूसरे दिन रविवार को लहरतारा स्थित सद्गुरु कबीर प्राकट्य धाम भक्ति, ज्ञान और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर रहा। देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे संत-महात्माओं ने कबीर साहेब के जीवन दर्शन, सत्संग, गुरु महिमा और मानव कल्याण के संदेश पर आधारित प्रवचनों व भजनों से श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया।

कार्यक्रम की शुरुआत प्राकट्य धाम के बाल संत आयुष दास, चंद्र प्रकाश और यशवंत द्वारा प्रस्तुत मधुर भजनों से हुई। इसके बाद संत अनुपम दास जी साहेब एवं छत्तीसगढ़ के नवागांव से पधारे महंत राधेश्याम शास्त्री ने “हमने सद्गुरु तुम्हें सत्यलोक से आते देखा…” भजन प्रस्तुत कर कबीर साहेब के दिव्य अवतरण और उनके जीवन दर्शन का मार्मिक वर्णन किया। भजन के दौरान पूरा पंडाल भक्तिरस में डूब गया।
नालंदा (बिहार) से आए महंत अगम मुनि साहेब ने कहा कि लहरतारा धाम समस्त कबीरपंथियों के लिए गुरु द्वार के समान है, जहां प्रत्येक श्रद्धालु को सेवा भाव से आना चाहिए। उन्होंने भोजपुरी भजन “लगवै गुरूजी से लगनवा…” प्रस्तुत कर श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
राजस्थान के जोधपुर से आईं साध्वी मंजू बाई जी ने मारवाड़ी भाषा में भजन प्रस्तुत करते हुए कहा कि सद्गुरु के जीवन में आने से मनुष्य का भाग्य जागृत हो जाता है और उसके समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं। वहीं बक्सर (बिहार) से आईं साध्वी इन्द्रमती एवं तारामती ने भोजपुरी भजनों से श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
हरियाणा के पानीपत से आए महंत ज्ञानेश्वर दास जी ने कहा कि वर्तमान समय में पूरी दुनिया को सद्गुरु कबीर साहेब के ज्ञान और प्रेम के संदेश की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि ज्ञान से सेवा, प्रेम और भक्ति का भाव उत्पन्न होता है तथा सद्गुरु का ज्ञान ही मनुष्य को वास्तविक मुक्ति का मार्ग दिखाता है।
धर्माधिकारी सुधाकर दास शास्त्री साहेब ने अपने प्रवचन में कबीर साहेब की साखियों का उल्लेख करते हुए कहा कि मनुष्य को दुर्मति छोड़कर हंस के समान पवित्र जीवन अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सद्गुरु कबीर साहेब किसी सांसारिक इच्छा से नहीं बल्कि समस्त जीवों पर करुणा करने के लिए इस पृथ्वी पर अवतरित हुए थे।
कार्यक्रम के मुख्य आशीर्वचन में पंथश्री हजूर अर्द्धनाम साहेब आचार्य कबीर पंथ ने कहा कि सुख और दुःख जीवन के अभिन्न अंग हैं, लेकिन सद्गुरु की शरण में आने वाला व्यक्ति इन दोनों से ऊपर उठकर आत्मिक आनंद का अनुभव करता है। उन्होंने कबीर साहेब के प्रसिद्ध दोहे “दुःख में सुमिरन सब करे…” का उल्लेख करते हुए कहा कि सत्संग और सद्गुरु का ज्ञान ही जीवन के सभी दुःखों का वास्तविक समाधान है।
दिनभर पूरा लहरतारा धाम कबीर साहेब के वचनों, साखियों, शब्दों और भजनों से गुंजायमान रहा। विभिन्न राज्यों से आए भजन मंडलों ने खंजरी की मधुर धुन पर कबीर भजनों की प्रस्तुति देकर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो स्वयं सद्गुरु कबीर साहेब अपने भक्तों के बीच विराजमान होकर ज्ञान का प्रकाश फैला रहे हों।
महोत्सव में बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, उत्तर प्रदेश, गुजरात, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों से हजारों श्रद्धालुओं ने सहभागिता की। सद्गुरु कबीर लहरतारा धाम सेवा समिति के सदस्यों ने पूरे आयोजन की व्यवस्थाओं का सफलतापूर्वक संचालन किया।
इस अवसर पर साध्वी सूरज कंवर साहेब की पुण्य स्मृति में जोधपुर (राजस्थान) निवासी मंजू सत्यप्रकाश परिवार द्वारा विशाल भजन-भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें संत-महात्माओं एवं श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
29 जून को निकलेगी भव्य शोभायात्रा
महोत्सव के तीसरे दिन सोमवार 29 जून को प्रातः 8 बजे से आश्रम से लहरतारा चौराहा, बौलिया, लहरतारा पुल होते हुए पुनः आश्रम तक भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। वहीं रात्रि 10 बजे से धनिधर्म दास जी साहेब की परंपरा के अनुसार सात्विक आनंद आरती एवं चौका विधान का आयोजन पंथश्री हजूर अर्द्धनाम साहेब के करकमलों द्वारा सम्पन्न होगा। कार्यक्रम का संचालन संतोष दास एवं गौतम दास जी ने किया।