
वाराणसी, दिनांक 13 मई 2026।
प्रधानमंत्री द्वारा देशवासियों से सोना न खरीदने की अपील के विरोध में बुधवार को वाराणसी जिला मुख्यालय पर स्वर्णकार समाज द्वारा एक अनोखा एवं प्रतीकात्मक प्रदर्शन किया गया। शुभम सेठ “गोलू” के नेतृत्व में आयोजित इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में स्वर्णकारों, सर्राफा व्यापारियों एवं कारीगरों ने हिस्सा लिया।
प्रदर्शन के दौरान स्वर्णकारी कार्य से जुड़े लोगों ने पारंपरिक आभूषण निर्माण के औजारों के स्थान पर हाथों में झालमूरी के डिब्बे लेकर प्रतीकात्मक रूप से झालमूरी बेचकर अपना विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि लगातार घटते स्वर्ण व्यापार और सरकार की अपील से इस व्यवसाय से जुड़े लाखों परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
इस अवसर पर शुभम सेठ “गोलू” ने कहा कि स्वर्ण व्यापार केवल एक व्यवसाय नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत एवं लाखों परिवारों की आजीविका का आधार है। उन्होंने कहा कि यदि इसी प्रकार स्वर्ण व्यवसाय को हतोत्साहित किया गया तो हजारों कारीगरों को अपना पारंपरिक रोजगार छोड़कर छोटे-मोटे कार्य करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि आज का यह प्रदर्शन सरकार को चेताने का प्रयास है कि स्वर्णकार समाज अपने अधिकारों एवं सम्मान की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखेगा। उन्होंने मांग की कि सरकार स्वर्ण व्यवसाय को प्रभावित करने वाले जनविरोधी बयानों एवं नीतियों पर पुनर्विचार करे तथा इस उद्योग से जुड़े लाखों व्यापारियों और कारीगरों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करे।
कार्यक्रम के दौरान शुभम सेठ “गोलू” द्वारा बनाई गई झालमूरी को लोगों ने उत्साहपूर्वक खरीदा और स्वर्णकार समाज के आंदोलन को समर्थन दिया। प्रदर्शन शांतिपूर्ण लेकिन अत्यंत प्रभावशाली रहा, जिसने आमजन का ध्यान स्वर्णकार समाज की समस्याओं एवं उनकी पीड़ा की ओर आकर्षित किया।
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से सूरज दयाल सेठ, किशन सेठ, मुकुंद सेठ, सुनीति सिंह, राज सेठ, विशाल सेठ, चेतन सोनी, विष्णु दयाल सेठ, सुजीत सेठ, संदीप सेठ, सुभाष सेठ एवं सुरेंद्र सेठ सहित बड़ी संख्या में स्थानीय सर्राफा व्यापारी, स्वर्ण कारीगर एवं समाज के गणमान्य लोग उपस्थित रहे।