
हनुमान जयंती के पावन अवसर पर श्री श्री 1008 डॉ. सचिन्द्र नाथ महाराज, श्रीकुल पीठ (सम्बद्ध प्रधान शक्तिपीठ माँ कामाख्या देवी, गुवाहाटी, असम), वाराणसी, उत्तरप्रदेश ने समस्त देशवासियों एवं सनातन धर्मावलंबियों को मंगलकामनाएँ प्रेषित कीं।
इस अवसर पर पूज्य महाराज ने अपने संदेश में कहा कि भगवान हनुमान केवल शक्ति के प्रतीक नहीं, बल्कि अटूट भक्ति, निष्ठा और सेवा भाव के जीवंत स्वरूप हैं। आज के समय में जब मानव जीवन अनेक चुनौतियों और भ्रमों से घिरा है, तब हनुमान जी के आदर्श हमें साहस, संयम और समर्पण का मार्ग दिखाते हैं।
“मनोजवं मारुततुल्यवेगं
जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्।
वातात्मजं वानरयूथमुख्यं
श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये॥”
महाराज ने कहा कि यह श्लोक हमें स्मरण कराता है कि हनुमान जी मन, बुद्धि और कर्म तीनों के संतुलन का अद्वितीय उदाहरण हैं।
उन्होंने आगे कहा कि आज समाज को “हनुमान तत्व” को आत्मसात करने की आवश्यकता है जो की भक्ति में स्थिरता (भगवान श्रीराम के प्रति समर्पण)शक्ति में संयम (बल का सदुपयोग) सेवा में निरंतरता (नर सेवा ही नारायण सेवा) पूज्य महाराज जी ने युवाओं से विशेष आह्वान करते हुए कहा कि वे हनुमान जी की तरह निस्वार्थ सेवा, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति को अपने जीवन में उतारें। यही सनातन संवर्धन का वास्तविक मार्ग है।
उन्होंने यह भी कहा कि ब्रह्मराष्ट्र एकम विश्व महासंघ के माध्यम से समाज में “हर घर हनुमान” का भाव जागृत किया जाए, जिससे प्रत्येक व्यक्ति अपने भीतर की शक्ति और चेतना को पहचान सके।
अंत में पूज्य महाराज जी ने सभी के सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हुए कहा कि :
“बुद्धिर्बलं यशो धैर्यं निर्भयत्वं अरोगता।
अजाड्यं वाक्पटुत्वं च हनुमत्स्मरणाद्भवेत्॥”
🚩 जय श्री राम | जय हनुमान | हर हर महादेव।