
समाचार आजकल।
योगी सरकार ने दी मंजूरी, प्रशासनिक समिति बनाने के प्रस्ताव पर लगी रोक
लखनऊ/उत्तर प्रदेश ।
उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव होने तक ग्राम प्रधानों को ही गांवों के विकास कार्यों की जिम्मेदारी सौंपे जाने का रास्ता साफ हो गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने प्रशासनिक समितियों के गठन के प्रस्ताव को मंजूरी नहीं दी है। बताया जा रहा है कि पंचायती राज विभाग की ओर से जल्द ही इससे संबंधित आदेश जारी किया जा सकता है।
जानकारी के अनुसार, पंचायत चुनाव में देरी और आरक्षण प्रक्रिया पूरी न होने के चलते सरकार ने यह निर्णय लिया है। पंचायत वोटर लिस्ट का अंतिम प्रकाशन 10 जून तक होना है, जबकि ओबीसी आरक्षण तय करने के लिए आयोग का गठन अभी बाकी है। वहीं मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट में भी विचाराधीन बताया जा रहा है।
अब तक पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद एडीओ (ADO) या बीडीओ (BDO) स्तर के अधिकारियों को प्रशासनिक जिम्मेदारी सौंपी जाती थी। हालांकि इस बार सरकार ने राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तराखंड की तर्ज पर ग्राम प्रधानों को ही जिम्मेदारी देने का फैसला लिया है।
राष्ट्रीय पंचायतीराज ग्राम प्रधान संगठन ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है। संगठन का कहना है कि स्थानीय समस्याओं और जरूरतों को ग्राम प्रधान बेहतर तरीके से समझते हैं, जिससे विकास कार्यों में तेजी आएगी।
प्रदेश में वर्तमान समय में कुल 57,695 ग्राम पंचायतें, 826 क्षेत्र पंचायतें और 75 जिला पंचायतें हैं। वहीं 2021 पंचायत चुनाव में क्षेत्र पंचायत अध्यक्ष चुनाव में भाजपा को 648 सीटें मिली थीं, जबकि जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में भाजपा ने 67 सीटों पर जीत दर्ज की थी।
सूत्रों के मुताबिक अब संभावना जताई जा रही है कि उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव 2027 विधानसभा चुनाव के बाद कराए जा सकते हैं।