
चिकित्सीय लापरवाही के आरोपों से घिरा पैनासिया हॉस्पिटल, निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग ।
वाराणसी। दुर्गाकुंड स्थित पैनासिया हॉस्पिटल के खिलाफ कथित चिकित्सीय लापरवाही के मामले में पीड़ित परिवार ने प्रेस वार्ता कर गंभीर आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की। परिवार का कहना है कि वे पिछले लंबे समय से प्रधानमंत्री कार्यालय, मुख्यमंत्री कार्यालय, जिलाधिकारी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) समेत विभिन्न अधिकारियों और विभागों के समक्ष न्याय की गुहार लगा रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें न्याय नहीं मिल सका है।
प्रेस वार्ता के दौरान पीड़िता के पुत्र शुभम सिंह और आशुतोष ने बताया कि उनकी मां का उपचार मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना के अंतर्गत पैनासिया हॉस्पिटल में कराया गया था। परिजनों का आरोप है कि ऑपरेशन के बाद उन्हें चिकित्सक के निजी चेंबर में बुलाकर 50 हजार रुपये की मांग की गई और पैसे न देने पर गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी गई।
परिजनों के अनुसार, ऑपरेशन के लगभग ढाई वर्ष बाद उनकी मां को पेट में असहनीय दर्द की शिकायत हुई। जांच के दौरान पता चला कि ऑपरेशन के समय शरीर के भीतर एक ड्रेन (नली) छूट गई थी, जिसके कारण लगातार स्वास्थ्य समस्याएं बनी रहीं। परिवार का आरोप है कि जब उन्होंने इस संबंध में अस्पताल प्रशासन से जवाब मांगा तो उनकी शिकायत सुनने के बजाय उन पर ही 50 लाख रुपये की रंगदारी मांगने का आरोप लगा दिया गया।
पीड़ित परिवार का कहना है कि उन्होंने इस मामले की शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय, मुख्यमंत्री कार्यालय, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, जिलाधिकारी तथा अन्य संबंधित अधिकारियों से की, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। परिवार ने सवाल उठाया कि आखिर ऐसा कौन-सा दबाव है जिसके चलते प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पैनासिया हॉस्पिटल के खिलाफ कार्रवाई करने से बच रहे हैं। उनका आरोप है कि मामले को दबाने और समझौते के लिए उन पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है।
परिजनों ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति या संस्था को निशाना बनाना नहीं है, बल्कि चिकित्सा व्यवस्था में जवाबदेही, पारदर्शिता और मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उनका कहना है कि यह केवल एक परिवार का मामला नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और मरीजों के अधिकारों से जुड़ा गंभीर विषय है।
परिजनों की प्रमुख मांगें
- मामले की उच्च स्तरीय एवं स्वतंत्र जांच कराई जाए।
- कथित दोषियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।
- सीएमओ की भूमिका एवं जवाबदेही तय की जाए।
- जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए।
- प्रधानमंत्री कार्यालय एवं मुख्यमंत्री कार्यालय मामले का संज्ञान लें।
- निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली और मरीज सुरक्षा मानकों की व्यापक समीक्षा की जाए।
आंदोलन जारी रखने की चेतावनी
पीड़ित परिवार ने स्पष्ट किया कि जब तक मामले की निष्पक्ष जांच शुरू नहीं होती और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने मीडिया, सामाजिक संगठनों और आम जनता से समर्थन की अपील करते हुए कहा कि न्याय मिलने तक उनकी लड़ाई नहीं रुकेगी।