
वाराणसी/जामनगर। पूज्य श्री श्री 1008 डॉ. सचिन्द्र नाथ महाराज ने कहा कि गौसेवा केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि करुणा, संस्कार, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक उत्तरदायित्व का आधार है। गुजरात के जामनगर जनपद की लालपुर तहसील स्थित एक आदर्श गौशाला का भ्रमण करने के बाद उन्होंने काशी में भी इसी तर्ज पर “श्री कामधेनु गौशाला” स्थापित करने का संकल्प व्यक्त किया।
गौशाला के संरक्षक समीर भाई पटेल ने बताया कि परिसर में 350 से अधिक गौ माताओं का संरक्षण किया जा रहा है। लगभग 55 परिवार प्रतिदिन स्वयं गौशाला पहुँचकर अपनी गौ माता की सेवा करते हैं, उन्हें चारा खिलाते हैं, गोबर साफ करते हैं और दूध लेकर लौटते हैं। आधुनिक जीवनशैली के बीच यह व्यवस्था सनातन संस्कृति और सामुदायिक सहभागिता का प्रेरक उदाहरण है।
महाराज जी ने कहा कि महानगरों में स्थान की कमी के कारण लोग गौ पालन नहीं कर पाते, ऐसे में लालपुर का यह मॉडल पूरे देश के लिए अनुकरणीय है। उन्होंने कहा कि काशी में प्रस्तावित “श्री कामधेनु गौशाला” केवल गौ संरक्षण का केंद्र नहीं होगी, बल्कि सेवा, संस्कार, पर्यावरण संरक्षण और आध्यात्मिक चेतना का भी प्रमुख केंद्र बनेगी।
उन्होंने कहा, “गौ सेवा केवल पुण्य अर्जित करने का माध्यम नहीं, बल्कि मनुष्य के भीतर करुणा, कर्तव्य और धर्मबोध को जागृत करने की साधना है। जिस समाज में गौ, गंगा, गुरु और संस्कृति का सम्मान सुरक्षित रहता है, वही समाज दीर्घकाल तक समृद्ध और संस्कारित बना रहता है।”
इस गौसेवा प्रकल्प को सफल बनाने में भरत भाई मेहता, ललित पंड्या, मयूर, इंद्रजीत गोहिल सहित अनेक गौसेवकों के योगदान की भी महाराज जी ने सराहना की और समाज से ऐसे प्रेरणादायी प्रयासों से जुड़ने का आह्वान किया।