
वाराणसी। शनिवार, 11 जुलाई 2016 को सुबह-ए-बनारस कार्यक्रम में मेघों की गरजना और वेदमंत्रों की पावन ध्वनि के बीच आध्यात्मिक और सांगीतिक वातावरण का अद्भुत संगम देखने को मिला। सुबह-ए-बनारस की ऋषिकाओं ने वैदिक मंत्रोच्चार से पूरे परिसर को आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत कर दिया। आचार्य संजीवनी जी ने लोकमंगल एवं विश्व कल्याण की कामना के साथ वैदिक यज्ञ संपन्न कराया।
इसके उपरांत युवा सितार वादक श्री रोनित चैटर्जी ने अपनी मनमोहक प्रस्तुति से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। तबला संगत जापान के वादक श्री हीमोरू मतसुदा तथा बनारस के श्री कृष्णा प्रजापति ने की। कार्यक्रम का शुभारंभ राग भैरव में आलाप और जोड़ से हुआ, जिसके बाद विलंबित तीनताल एवं द्रुत तीनताल में निबद्ध स्वर रचनाओं की प्रभावशाली प्रस्तुति दी गई। कार्यक्रम का समापन दादरा “बांध के पिरितिया के डोर” की मधुर प्रस्तुति के साथ हुआ, जिसे श्रोताओं ने खूब सराहा।
कार्यक्रम के अंत में समाजसेवी एवं युवा उद्यमी डॉ. कुमार प्रशांत मिश्रा ने कलाकार को सम्मानस्वरूप प्रमाण-पत्र प्रदान किया। सुबह-ए-बनारस के संस्थापक सचिव डॉ. रत्नेश वर्मा ने कलाकारों का स्वागत करते हुए शुभाशीष दिया। कार्यक्रम का संचालन उपाध्यक्ष पं. प्रमोद कुमार मिश्रा ने किया।