. नगर निगम वाराणसी 48 घंटे में दुरुस्त होंगी खराब स्ट्रीट लाइटें, शिकायतों के लिए लगेगा क्यूआर कोड​ महापौर ने ईईएसएल की जगह नई फर्म के चयन के लिए जल्द टेंडर प्रक्रिया शुरू करने के दिए निर्देश।

48 घंटे में दुरुस्त होंगी खराब स्ट्रीट लाइटें, शिकायतों के लिए लगेगा क्यूआर कोड

-​महापौर ने ईईएसएल की जगह नई फर्म के चयन के लिए जल्द टेंडर प्रक्रिया शुरू करने के दिए निर्देश

-​18 वार्डों में लगेंगी 999 सोलर और 130 हाई मास्ट लाइटें, पार्षदों के कोटे वाली लाइटों के लिए एक हफ्ते की डेडलाइन

-​नगर निगम के वर्कशॉप में अब नहीं होगी गाड़ियों की मरम्मत, अधिकृत सर्विस सेंटर पर ही करानी होगी सर्विसिंग

​वाराणसी : शहर की सड़कों और गलियों को दूधिया रोशनी से चमकाने और खराब लाइटों की शिकायतों का त्वरित निस्तारण करने के लिए नगर निगम अब हाईटेक व्यवस्था अपनाने जा रहा है। सिगरा स्थित स्मार्ट सिटी सभागार में बुधवार को.आलोक व परिवहन विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान महापौर अशोक कुमार तिवारी ने खराब स्ट्रीट लाइटों की पहचान और शिकायत के लिए क्यूआर कोड या जीआई बोर्ड लगाने के निर्देश दिए हैं। इस बोर्ड पर विधानसभा, वार्ड और मोहल्ले के कोड के साथ स्ट्रीट लाइट का नंबर भी दर्ज होगा, जिससे आम नागरिकों को शिकायत दर्ज कराने में आसानी होगी और निगम प्रशासन 48 घंटों के भीतर लाइटों की मरम्मत सुनिश्चित कर सकेगा।
​शहर में वर्तमान में अधिकांश लाइटें ईईएसएल कंपनी की हैं, जिनके रखरखाव की अवधि दिसंबर में समाप्त हो चुकी है। वर्तमान में निगम अपने स्तर पर व्यवस्था संभाल रहा है, जिसे देखते हुए महापौर ने तत्काल नई फर्म के चयन के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू करने को कहा है। उन्होंने दो हजार लाइटों का स्टॉक रखने का निर्देश दिया ताकि खराब लाइटों को तत्काल बदला जा सके। इसके साथ ही महापौर ने पार्षदों के कोटे की लाइटें एक सप्ताह में लगवाने और चिन्हित 18 वार्डों में 999 सोलर लाइट व 130 हाई मास्ट लाइटें लगाने की योजना को जल्द धरातल पर उतारने पर जोर दिया।
​बैठक में नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने निगम की आय बढ़ाने और फिजूलखर्ची रोकने के लिए नवाचार पर बल दिया। उन्होंने प्रस्ताव रखा कि इस बार देव दीपावली पर किराए की झालरों के बजाय प्रयोग के तौर पर निगम खुद की झालरें खरीदकर कुछ कुंडों या घाटों को सजाएगा, जिससे भविष्य में बड़े खर्च की बचत होगी। वहीं, परिवहन विभाग की समीक्षा में महापौर ने वाहनों की मरम्मत को लेकर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने सख्त निर्देश दिए कि अब कोई भी वाहन निगम के वर्कशॉप में ठीक नहीं होगा, बल्कि अनिवार्य रूप से अधिकृत सर्विस सेंटर के माध्यम से ही सर्विसिंग करानी होगी। उन्होंने जोनल स्वच्छता अधिकारियों को भी फील्ड में उतरने और कहीं भी कूड़ा दिखने पर तत्काल उठवाने की जिम्मेदारी सौंपी। बैठक में अपर नगर आयुक्त व आलोक तथा परिवहन विभाग के प्रभारी विनोद गुप्ता, सहायक अभियंता (आलोक विभाग) पिषूष मेहरा, आलोक निरीक्षक केके गुप्ता व हरिश मिश्रा, परिवहन विभाग के प्रभारी सुमन राव, जोनल स्वाच्छता अधिकारी गजेंद्र चौहान व संदीव भार्गव सहित अन्य लोग उपस्थित थे।

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