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‘धान का कटोरा’ चंदौली की कृषि भूमि बचाने की पैरवी, वैकल्पिक रूट और तकनीकी परीक्षण की मांग।
चंदौली के सांसद वीरेंद्र सिंह ने प्रस्तावित विंध्य एक्सप्रेस-वे के मार्ग को लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को ज्ञापन सौंपते हुए उपजाऊ कृषि भूमि के अधिग्रहण पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि वर्तमान प्रस्तावित मार्ग से हजारों एकड़ उपजाऊ भूमि प्रभावित होगी, जिससे बड़ी संख्या में किसान परिवारों के विस्थापन और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है।
सांसद ने ज्ञापन में कहा कि चंदौली पूर्वांचल का “धान का कटोरा” माना जाता है और जिले की लगभग 80 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर है। बरहनी ब्लॉक समेत कई गांवों की अति उपजाऊ भूमि से एक्सप्रेस-वे गुजरने की स्थिति में किसानों की आजीविका पर गहरा संकट खड़ा हो सकता है।
उन्होंने यह भी बताया कि भारतमाला परियोजना के तहत एक ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे पहले से निर्माणाधीन है, जो पंचफेड़वा से कुमारपुर होते हुए गाजीपुर के जमनिया तक जाएगा। ऐसे में मात्र 3 से 4 किलोमीटर की दूरी पर समानांतर विंध्य एक्सप्रेस-वे का निर्माण व्यावहारिक और आर्थिक दृष्टि से उचित नहीं है।
वहीं, नरवन, महाईच, परना, बरहनी और खगवल सहित कई गांवों के किसान पिछले कई महीनों से “भूमि बचाओ आंदोलन” चला रहे हैं। किसानों का कहना है कि जब एक एक्सप्रेस-वे पहले से बन रहा है, तो दूसरी सड़क के लिए उपजाऊ कृषि भूमि का अधिग्रहण अनावश्यक है। भारतीय किसान मजदूर संयुक्त यूनियन ने भी प्रधानमंत्री को पत्र भेजकर इस योजना को निरस्त करने की मांग की है।
सांसद वीरेंद्र सिंह ने कहा कि विकास आवश्यक है, लेकिन ऐसा विकास मॉडल अपनाया जाना चाहिए जो किसानों की आजीविका, उपजाऊ भूमि और पर्यावरण की रक्षा करते हुए आगे बढ़े। ज्ञापन की प्रति केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को भी भेजी गई है।
किसानों का मानना है कि सांसद की यह पहल उनकी आवाज को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है और इससे चंदौली ही नहीं, बल्कि पूरे पूर्वांचल के किसानों के हितों की रक्षा की उम्मीद बढ़ी है।
⭐ मुख्य मांग।
- PMO को ज्ञापन सौंपकर सांसद वीरेंद्र सिंह ने विंध्य एक्सप्रेस-वे के प्रस्तावित रूट पर जताई आपत्ति।
- चंदौली की उपजाऊ कृषि भूमि और किसानों के विस्थापन पर गंभीर चिंता व्यक्त की।
- पहले से निर्माणाधीन भारतमाला ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे का हवाला देते हुए वैकल्पिक रूट की मांग की।
- कई गांवों के किसान महीनों से “भूमि बचाओ आंदोलन” चला रहे हैं।
- सांसद ने तीन प्रमुख मांगें रखीं—तकनीकी परीक्षण, वैकल्पिक मार्ग और किसानों की आजीविका व पर्यावरण को प्राथमिकता।
- ज्ञापन की प्रति केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को भी भेजी गई।